उरी आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने सीमा पार जाकर आतंकियों के लॉन्च पैड को ध्वस्त करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। देशभर में सेना के इस पराक्रम को सलाम किया गया। अब अमावस की उस रात की पूरी कहानी सामने आई है। इस ऑपरेशन में भारतीय कमांडो आतंकियों पर कहर बनकर टूटे थे। उस दौरान फौजियों ने अपनी जान की परवाह भी नहीं की। गणतंत्र दिवस पर इस ऑपरेशन में शामिल फौजियों की वीरता को सलाम किया गया। इस मिशन में शामिल फौजी वीरता के पदक से नवाजे गए। 4 स्पेशल पैरा फोर्सेज और 9वीं बटालियन के जवानों को युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। इनमें एक कर्नल, पांच मेजर, दो कैप्टन, एक सूबेदार, दो नायब सूबेदार, तीन हवलदार, एक लांस नायक और चार पैराट्रूपर्स के जवान थे।

पाकिस्तान को उसके ही घर में घुसकर जवान देने की हमने ठान ली थी। आतंकियों के 7 कैंप उरी के दूसरी तरफ थे, यानि लाइन ऑफ कंट्रोल के दो किलोमीटर भीतर। 28-29 सितंबर, 2016 की आधी रात को मेजर रोहित सूरी 4 पैरा के आठ जवानों के साथ गुलाम कश्मीर के भीतर आतंकी लॉन्च पैड तक पहुंच गए थे। इससे पहले की हमारे जवान कुछ एक्शन लेते आतंकियों को हमारे आने की खबर हो गई थी और उन्होंने गोलीबारी करना शुरू कर दिया था, लेकिन हमे कोई जल्दबादी नहीं थी, हमारे जवानों को सुबह होने का इंतजार था।

सुबह 6 बजे जैसे ही गोलीबारी बंद हुई हमारे जवान आतंकियों पर टूट पड़े। हर कैंप में 4 से 5 आतंकी थे। सेना के कमाडोज़ ने अचानक हमला बोल दिया। आतंकियों की तरफ से जवाबी कार्रवाई हुई, लेकिन भारत के बहादुर जवानों ने उनकी एक नहीं चलने दी और एक-एक करके सभी का सफाया कर दिया। यह भी पढ़ें: भारतीय सेना ने POK में किया सर्जिकल स्ट्राइक, आतंकवादियो को मार गिराया

आमने-सामने की लड़ाई के दौरान यूएवी के मार्फत दो आतंकियों के भागने की जानकारी मिली। रोहित सूरी ने जान की परवाह किए बिना आतंकियों का पीछा कर नजदीकी लड़ाई में दोनों को मार गिराया। सूरी ने ऐसा नहीं किया होता तो सभी जवानों की जान खतरे में पड़ सकती थी। इस वीरता के लिए मेजर सूरी को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।

इतने बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने से पहले हमें उनके ठिकानों के बारे में पता लगाना था।  एक दूसरे मेजर को 27 सितंबर को यानि सर्जिकल स्ट्राइक के एक दिन पहले ही अपने लक्ष्‍य पर नजदीक से निगाह रखने का आदेश दिया गया था। मेजर ने अपनी टीम के साथ मिलकर  स्‍ट्राइक के 48 घंटे पहले ही एलओसी पारकर सर्विलांस कर रहा था।

इस टीम ने पूरे टारगेट जोन की मैपिंग की हथियारों को रखने की जगह को नष्‍ट कर दिया और दो आतंकियों को ढेर किया। जब यह सैन्‍य कार्रवाई हो रही थी तभी एक दूसरी जगह से उन पर गोलियां चलाई जाने लगीं। इस मेजर ने खतरे को भांपते हुए तत्‍काल वहां का रुख किया और वहां छिपे एक आतंकी को मार गिराया। इसके लिए मेजर को शौर्य चक्र से सम्‍मानित किया गया।

इस ऑपरेशन में शामिल तीसरे मेजर ने अपनी टीम के साथ आतंकियों की एक शरणस्‍थली पर हमला कर उसको नष्‍ट कर दिया। साथ ही वहां सोते हुए सभी आतंकियों को मार दिया गया। यह मेजर अपने साथी जवानों को ऑपरेशन के बारे में भी पूरी जानकारी दे रहा था। इस मेजर को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही चौथे मेजर को ग्रेनेड हमले से दुश्‍मन के ऑटोमेटिक हथियारों को नष्‍ट करने और नजदीक से दो आतंकियों को मार गिराने के चलते सेना मेडल से सम्‍मानित किया गया।

सर्जिकल स्ट्राइल को अंजाम देना इतना आसान नहीं था। आतंकवादियों  ने भी मोर्चा संभाल लिया था। पांचवें मेजर ने जब तीन आतंकियों को देखा कि वे आरपीजी (रॉकेट प्रोपेल्‍ड ग्रेनेड) से चौथे मेजर की टीम पर हमला करने जा रहे हैं तो उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना उन आंतकियों तक पहुंचकर उन्हें मार गिराया।

रोहित सूरी के अलावा चार जवानों मेजर रजत चंद्रा, मेजर दीपक कुमार उपाध्याय, कैप्टन आशुतोष कुमार और नायब सूबेदार विजय कुमार को वीरता के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है।