इंफाल. मणिपुर विश्वविद्यालय के छात्र संघ के सदस्यों के राजभवन और भाजपा के मुख्य कार्यालय में घुसने की कोशिश के एक दिन बाद मंगलवार को इंफाल के उच्च सुरक्षा वाले इलाके में सुरक्षा कर्मियों को दंगा रोधी उपकरणों के साथ तैनात किया गया है. केंद्रीय विश्वविद्यालय में बीते 47 दिन से शैक्षिक गतिविधियों बंद हैं क्योंकि शिक्षक, छात्र और कर्मचारी संघ के सदस्य कुलपति आद्या प्रसाद पाण्डेय को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. उन पर आर्थिक अनियमितताएं करने और प्रशासिनक लापरवाही बरतने का का आरोप है.

हंगामे में कम से कम सात आंदोलनकारी कथित रूप से घायल हो गए हैं. इनमें अधिकतर डेमोक्रेटिक स्टूडेंड अलांइस ऑफ मणिपुर (डीईएसएएम) से संबंधित हैं. पुलिस सूत्रों ने बताया कि राज भवन की सुरक्षा सीआरपीएफ के कर्मी कर रहे हैं. राजभवन के मुख्य द्वार पर लोहे के बेरीकेड तथा कंटीले तारों को लगा गया है. उन्होंने बताया कि राज भवन के आसपास राज्य पुलिस के दर्जनों कमांडों को तैनात किया गया है.

सुरक्षाकर्मी तैनात
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि संजेंथांग, केसाम्पत और सिंग्जामेई इलाकों में सुरक्षा अधिकारी तैनात किए गए है, क्योंकि इस तरह की खबर थी कि आंदोलनकारी डीईएसएएम के स्वयंसेवकों के खिलाफ कल की गई कार्रवाई के विरोध में एक रैली निकाल सकते हैं और मानव श्रृंखला बना सकते हैं. उन्होंने कहा की रैली के आह्वान को वापस ले लिया गया है. डीईएसएएम के अध्यक्ष एस आकाश को आज राज्यपाल नजमा हेपेतुल्ला से मिलने दिया गया. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि वह केंद्र को विश्वविद्यालय की स्थिति के बारे में बताना चाहते हैं. आकाश ने कहा कि हमने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वह केंद्र से विश्वविद्यालय के संकट को हल करने की गुजारिश करें। ऐसा करने में विफल रहने पर आंदोलन तेज किया जाएगा.

शिक्षक संघ ने ये कहा
मणिपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के प्रोफेसर रणजीत सिंह ने बताया कि कुलपति के काम करने के तरीके के विरोध में बीते 47 दिन में छह डीन और 29 विभागाध्यक्षों ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है. मणिपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष एम दयामंद सिंह ने कहा, ‘‘हमारी पहली मांग कुलपति पाण्डेय को बर्खास्त करना है और दूसरी मांग उनके खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र सीमित का गठन करने की हैं.