start wearing masks even within homes इस कोरोना संकट में सबसे सुरक्षित जगह कौन सी है? इसका सीधा सा जवाब होगा कि आपका अपना घर. लेकिन अब शायद ऐसा नहीं है. कोरोना की दूसरी लहर ने भारत को इतनी बुरी तरह से प्रभावित किया है कि अब अपने घरों में भी आपको मास्क पहनना पड़ सकता है. दरअसल जब आप अपने घर के अन्दर होते हैं तब खुद को सबसे अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं. लोगों को लगता है कि घर में मास्क पहनने की ज़रूरत नहीं है. लेकिन अब सरकार आपको घर के अंदर भी मास्क पहनने की सलाह दे रही है.Also Read - Monkeypox Disease: यौन संबंध बनाने से भी फैल सकता है 'मंकीपॉक्स' वायरस, विशेषज्ञों ने चेताया

सोमवार को भारत सरकार ने टीकाकरण और कोविड-19 से बचाव के लिए उपयुक्त व्यवहार अपनाने पर जोर देते हुए सलाह दी है कि यह ऐसा समय है कि लोगों को घर के भीतर भी मास्क पहनना चाहिए. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि समय आ गया है कि लोगों को घरों में भी मास्क पहनना चाहिए. Also Read - युवा शिविर में बोले पीएम मोदी, भारत आज दुनिया की नई उम्मीद बनकर उभरा है

गौरतलब है कि भारत कोरोना संकट से बुरी तरह प्रभावित है. अस्पताल ऑक्सीजन और बेड के संकट से जूझ रहे हैं. ऐसे में सरकार का घरों में मास्क पहनने की सलाह देना चिंतित करने जैसा है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि देश में कोरोना का प्रकोप कितनी तेजी से बढ़ रहा है. Also Read - दिल्ली में बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के करीब 400 नए केस, दो लोगों की गई जान

सरकार ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति सामाजिक दूरी के नियम का पालन नहीं करे तो वह 30 दिन में 406 लोगों को संक्रमित कर सकता है. अगर संक्रमित व्यक्ति की गतिविधि 50 प्रतिशत तक थम जाए तो इस अवधि में केवल 15 लोग संक्रमित होंगे. वहीं गतिविधि 75 प्रतिशत तक घटने पर एक व्यक्ति 30 दिनों में 2.5 लोगों को संक्रमित कर सकता है.

इस बीच सरकार ने लोगों की आशंकाओं को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा है कि अनावश्यक अफरातफरी से लाभ के बजाय नुकसान हो रहा है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कई लोग डर से अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं. उन्होंने जोर दिया कि डॉक्टरों की सलाह पर ही अस्पताल में भर्ती होना चाहिए.

चिकित्सकीय ऑक्सीजन की कमी पर सरकार ने कहा है कि भारत में पर्याप्त चिकित्सकीय ऑक्सीजन उपलब्ध हैं लेकिन इसे अस्पतालों तक पहुंचाना चुनौती है. सरकार ने अस्पतालों से तर्कसंगत तरीके से ऑक्सीजन का इस्तेमाल करने को कहा है. मरीजों को रेमडेसिविर और टोसिलिजुमाब जैसी दवा भी तार्किक तरीके से लिखने पर जोर दिया है.