नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के मंडावली इलाके में भूख से तीन बच्चियों की मौत मामले में कई दर्दनाक चीजें सामने आ रही हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बच्चियों की मां ने ही सबसे पहले अपने बच्चों को मृत अवस्था में देखा था. वह सुबह में पतीले में चावल रखकर खाने के लिए अपने बच्चों को जगाने गई. उसने सबसे पहले बड़ी बच्ची को जगाई लेकिन उसके हाथ-पाथ ठंडे पड़े देख वह चिल्लाई. उसे पता चल गया कि उसकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है. इसके बाद उसने तुरंत दूसरी और तीसरी बेटी को जगाने की कोशिश की. इतने में पास ही मौजूद उसके पति के दोस्त ने उसका मुंह बंद करा दिया. दरअसल, बच्चियों का रिक्शा चालक पिता आर्थिक स्थिति खराब होने और मकान मालिक को किराया नहीं दे पाने के कारण अपना कमरा खाली कर चुका था. वह परिवार को अपने दोस्ते के कमरे में रखा हुआ था. उसके बाद से ही वह लापता है.

जिस दोस्त के घर रिक्शाचालक का परिवार था वहां भी स्थिति अच्छी नहीं थी. उसके पास एक छोटा का कमरा था. रिक्शाचालक का दोस्त अपने मकान मालिक से छिपाकर बच्चों और महिला को अपने यहां रखा हुआ था. घटना के वक्त बच्चियों की मां के चिल्लाने से वह डर गया. उसने तुरंत उसे चुप कराया और बताया कि अगर वह रोएगी तो उसके मकान मालिक को पता चल जाएगा और वह तुरंत सभी को घर से बाहर कर देगा. इस कारण वह भूख से अपने बच्चों की मौत को देखते रही लेकिन उसकी आंखों से आंसू के एक बूंद तक नहीं निकले.

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गौरतलब है कि तीन बच्चियों की मौत के मामले में दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है. इसमें कहा गया है कि तीनों लड़कियों के पेट खाली थे और उनके शरीर में जरा सा भी वसा नहीं पाया गया. बच्चियों के पिता का पता लगाने के लिए पुलिस की टीमें गठित की गई हैं.

गरीबी और बीमारी के कारण मौतें
इस बीच केंद्र सरकार ने भी तीनों बहनों की मौत के मामले में जांच के आदेश दिए हैं जबकि दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि गरीबी और बीमारी के कारण मौतें हुई हैं और यह व्यवस्था की सबसे बड़ी नाकामी है. इस घटना के बाद संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई. भाजपा और कांग्रेस इतने चौंकाने वाले मामले का ठीकरा आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर फोड़ रहे हैं जबकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी नेताओं से कह रही है कि वे इस मामले का राजनीतिकरण नहीं करें.

कई नेताओं ने आज मृतक लड़कियों की मां से मिलकर उन्हें नगद राशि दी. वह हताश और बीमार दिख रही थीं. 24 जुलाई को घर से जाने के बाद ही इन लड़कियों के पिता वापस नहीं लौटे हैं. उसी दिन लड़कियों की मां उन्हें अस्पताल लेकर गई थी. सिसोदिया ने समेकित बाल विकास सेवा निदेशालय से कहा कि वह इलाके में रह रहे लोगों के रिकॉर्ड रखने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों का ब्योरा सौंपे और जवाबदेही तय करें. इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली सरकार और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को नोटिस जारी कर चार हफ्तों के भीतर उनसे रिपोर्ट मांगी है.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्दनाक खुलासा
पूर्वी दिल्ली के लालबहादुर शास्त्री अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमिता सक्सेना ने बताया कि मंगलवार शाम में पोस्टमार्टम हुआ. बुधवार को वे समीक्षा चाहते थे इसलिए कैमिकल टॉक्सिलोजी का भी सुझाव दिया गया. इसके बाद मेडिकल बोर्ड बनाया गया और जीटीबी अस्पताल में दूसरी बार अंत्यपरीक्षण हुआ. पोस्टमार्टम के बाद फॉरेंसिक विशेषज्ञ किस नतीजे पर पहुंचे, इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जख्म का निशान नहीं था. यह पूरी तरह कुपोषण का मामला लगता है. शरीर में हड्डियां निकल आई थीं और पेट, मूत्राशय और मलाशय पूरी तरह खाली था. हम दूसरी राय लेना चाहते थे और पूरी तरह संतुष्ट होना चाहते थे इसलिए जीटीबी अस्पताल में दूसरा पोस्टमार्टम कराया गया. इन बच्चों की मौत भयावह और दर्दनाक है.