नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए आठ फरवरी को होने वाले मतदान का अनुपात बढ़ाने के लिए राज्य निर्वाचन मशीनरी ने पूरी ताकत झोंक दी है. इसी कड़ी में दिल्ली के मुख्य चुनाव कार्यालय की सैकड़ों टीमें शनिवार को विद्यार्थियों के साथ गली-गली घूमीं. बच्चों के हाथों में नारे लिखी तख्तियां थीं, जिनपर मतदान के प्रति जनमानस को जागरूक करने के लिए आकर्षक नारे लिखे हुए थे.

राज्य चुनाव आयोग मुख्यालय के नोडल अधिकारी (मीडिया) नलिन चौहान ने बताया कि राज्य चुनाव मुख्यालय बीते लोकसभा चुनाव में मतदान के अनुपात से ऊपर इस विधानसभा चुनाव में मतदान कराने की कोशिश कर रहा है. इसके लिए मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. रणबीर सिंह के नेतृत्व में हर-संभव कोशिश जारी है. इन्हीं कोशिशों का हिस्सा थी शनिवार को दिल्ली के हर विधानसभा क्षेत्र में विद्यार्थियों की मदद से निकाली गई मतदान जागरूकता रैली. स्कूली बच्चों के हाथों में मौजूद पट्टियों पर ‘छोड़ो अपने सारे काम, आठ फरवरी को करें मतदान’, ‘यह सबकी जिम्मेदारी, वोट करेगी दिल्ली सारी’ और ‘मम्मी पापा नोट करें, 8 फरवरी को वोट करें’, जैसे नारे लिखे हुए थे.

राज्य चुनाव मुख्यालय की टीमों ने देवली और दक्षिणपुरी इलाकों का भी दौरा किया. यहां मतदाता जागरूकता रैलियां भी निकाली गईं. इन इलाकों में 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान मतदान का प्रतिशत कम रहा था. देवली विधानसभा में 2,30,702 मतदाता पंजीकृत हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में इन पंजीकृत मतदाताओं में से केवल 91,658 मतदाताओं ने ही मताधिकार का उपयोग किया था. इन दोनों ही इलाकों में ‘अपनी कोशिश’ नुक्कड़ नाटक के जरिए भी मतदाताओं को मतदान में ज्यादा से ज्यादा भागीदारी निभाने के लिए प्रोत्साहित किया गया. यहां इन जागरूकता रैलियों के दौरान मतदाताओं को ईवीएम और वीवीपैट के बारे में भी बताया गया. सुबह नौ बजे से 10 बजे के बीच इन रैलियों का आयोजन किया गया. मतदाता जागरूकता प्रभात फेरियों में कक्षा चार और पांच के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी निभाई.

मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. रणबीर सिंह ने कहा कि इन प्रभात रैलियों में 250 प्राथमिक विद्यालयों के करीब 1,500 विद्यार्थियों ने भागीदारी निभाई. हमें विश्वास है कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली में जहां-जहां कम मतदान हुआ था, उन जगहों पर इन रैलियों के जरिए चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के परिणाम जरूर सकारात्मक ही सामने आएंगे. और इन इलाकों में मतदान पिछले लोकसभा चुनाव की तुलना में कहीं ज्यादा हो सकेगा.