नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजों ने मंगलवार को फिर पत्थरबाज़ी की. पत्थरबाजी तब शुरू हुई जब गांव के बाहर मौजूद लोगों ने सेना को देखा. मंगलवार को ऐसी भी रिपोर्ट आई थी की पत्थरबाज़ों ने शहीद लेफ्टिनेंट उमर फयाज़ जनाजे को भी नहीं बख्शा मगर यह खबर गलत साबित हुई. पत्थरबाज़ों ने शव यात्रा पर पत्थर नहीं फेंके.

आतंकवादियों ने लेफ्टिनेंट उमर फयाज का अपहरण कर बेरहमी से हत्या कर दी. घटना मंगलवार रात को कश्मीर के शोपियां में हुई. सेना के लेफ्टिनेंट उमर फयाज कश्मीर के कुलगाम के ही रहने वाले थे. जून 1994 में जन्मे फयाज जम्मू के अखनूर में दूसरी बटालियन, राजपूताना राइफल्स में तैनात थे. फयाज ने 2015 में एनडीए से पास कर इंडियन मिलिट्री एकेडमी ज्वाइन किया था जहां 10 दिसंबर 2016 में सेना में उनकी कमिशनिंग हुई थी. 8 जून को वह 23 साल के होने वाले थे.

दक्षिण कश्मीर में लोगों ने पत्थर को बड़ा हथियार बना लिया है. आए दिन सेना और पुलिस जवानों पर पत्थरबाजी हो रही है. लेकिन ये अपनी तरह का अलग मामला है जहां एक शहीद सैनिक की शवयात्रा को भी पत्थरबाजों ने नहीं बख्शा. ये घटना बताती है कि सेना और सरकार से जुड़े लोगों से किस कदर नफरत की जा रही है. आतंकियों का संदेश साफ है, सेना और पुलिस की नौकरी से दूर रहो.

हाल ही में जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी ने भी पुलिसकर्मियों को अपने घर न जाने की सलाह दी थी. पुलिसकर्मियों की जान को खतरा देखते हुए ऐसी एडवाइजरी जारी करनी पड़ी. कुछ पुलिसकर्मियों के घर पर आतंकी हमले को देखते हुए पुलिस प्रमुख ने ये एडवाइजरी जारी की थी. कुछ दिन पहले ही आतंकियों ने पुलिस मुखबिरी के शक में कुछ युवकों को बेरहमी से पीटकर उनके बाल काट दिए थे.