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ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने से हाहाकार! पेट्रोल-डीजल और गैस के बाद क्या शराब भी महंगी होगी ?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा व्हिस्की उत्पादक है, इसलिए आयातित हिस्सा सीमित रहता है. कुल मिलाकर, यदि संघर्ष जल्द समाप्त नहीं हुआ तो अप्रत्यक्ष प्रभाव से प्रीमियम विदेशी शराब थोड़ी महंगी हो सकती है.
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावी रूप से बंद हो गया है, जिससे वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है. फरवरी 28, 2026 को ईरान पर हमले के बाद इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की घोषणा की, जिसके बाद जहाजों का ट्रैफिक 97 प्रतिशत से अधिक घट गया. संयुक्त राष्ट्र और शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह बंदी अब भी जारी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और शिपिंग, इंश्योरेंस तथा ईंधन खर्च प्रभावित हुए हैं.
भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि पेट्रोल, डीजल और गैस के अलावा अन्य आयातित वस्तुओं पर भी असर पड़ रहा है. विदेशी शराब (इंपोर्टेड लिकर) की कीमतों पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि प्रीमियम स्कॉच व्हिस्की, फ्रेंच वाइन, अमेरिकी बर्बन आदि समुद्री रास्तों से ही भारत पहुंचती हैं.
भारत में अल्कोहल मार्केट
भारत में अल्कोहल मार्केट 2023 में लगभग 55 अरब डॉलर का था, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है. फाइनेंशियल ईयर 2024 में भारत ने 1 अरब डॉलर से अधिक की शराब आयात की, जिसमें यूके से 374 मिलियन डॉलर, अमेरिका से 163 मिलियन डॉलर और फ्रांस, इटली, सिंगापुर आदि से भी महत्वपूर्ण हिस्सा आया. आयात में 74 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो प्रीमियम सेगमेंट की बढ़ती मांग को दर्शाता है.
इन शराबों पर पड़ेगा असर
‘स्प्रिट्ज’ मैगजीन के को-फाउंडर और ग्रुप एडिटर बिशन कुमार के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बंदी से विदेशी शराब की कीमतों पर सीधा और तत्काल असर नहीं पड़ेगा. अधिकांश यूरोपीय शराब (वाइन, शैंपेन, कॉन्यैक) मेडिटेरेनियन रूट से सुएज कैनाल होते हुए आती है, जो होर्मुज से प्रभावित नहीं होता. हालांकि, कुछ शिपमेंट्स दुबई के जेबल अली पोर्ट से ट्रांजिट होती हैं, जहां होर्मुज रूट से गुजरना पड़ता है. यहां स्टॉक पाइलिंग और री-एक्सपोर्ट प्रभावित हो सकता है.
यूके से स्कॉच व्हिस्की इंग्लिश चैनल, स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर, मेडिटेरेनियन और सुएज से हिंद महासागर पहुंचती है, लेकिन दुबई ट्रांजिट वाले हिस्से पर असर संभव है. यदि तनाव लंबा खिंचा तो शिपिंग देरी, ईंधन कीमतें बढ़ना और वॉर रिस्क इंश्योरेंस के कारण लागत बढ़ सकती है.
स्टॉक की कमी और मामूली मूल्य वृद्धि
सामान्यतः शिपमेंट में 2-3 महीने लगते हैं, लेकिन अब और समय लग सकता है, जिससे स्टॉक की कमी और मामूली मूल्य वृद्धि हो सकती है. बिशन कुमार का कहना है कि भारत में प्रीमियम विदेशी शराब का बाजार बढ़ रहा है, लेकिन कुल खपत में घरेलू शराब का दबदबा है.
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