
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Strait of Hormuz Latest Update: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से तनाव बढ़ गया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा की जीवनरेखा माना जाता है, एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के मैदान में तब्दील होता नजर आ रहा है. पिछले 24 घंटों के घटनाक्रम ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है.
जहां कुछ समय पहले इस समुद्री मार्ग के पूरी तरह खुलने की उम्मीद जगी थी, वहीं अब यहां तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है. स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि व्यापारिक जहाजों पर हमले शुरू हो चुके हैं, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा पैदा हो गया है.
हाल ही में ईरान ने अपने बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी के बीच एक सकारात्मक कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने का ऐलान किया था. इस घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई और इस क्षेत्र में फंसे दर्जनों जहाजों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन यह शांति अल्पकालिक सिद्ध हुई.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सख्त बयान जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया कि ईरान पर से नाकेबंदी तब तक नहीं हटाई जाएगी, जब तक कि परमाणु कार्यक्रम और अन्य विवादित मुद्दों पर 100 प्रतिशत डील पूरी नहीं हो जाती. ट्रंप के इस रुख ने ईरान को भड़का दिया और कुछ ही घंटों के भीतर समुद्री शांति भंग हो गई.
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ट्रंप के बयान के तुरंत बाद होर्मुज को फिर से ब्लॉक करने की घोषणा कर दी. IRGC ने चेतावनी दी कि इस मार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज को दुश्मन का सहयोगी माना जाएगा. इस तनाव की सबसे बड़ी आंच भारत पर आई, जब शनिवार को ईरान की गनबोट्स ने दो भारतीय व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग कर दी.
इन जहाजों को जान बचाकर वापस लौटने पर मजबूर होना पड़ा. इस हिंसक घटना के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया है. नई दिल्ली स्थित ईरान के राजदूत को विदेश मंत्रालय द्वारा तलब किया गया है और भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है. यह घटना दर्शाती है कि दो महाशक्तियों की लड़ाई में निर्दोष व्यापारिक जहाज और अंतरराष्ट्रीय नाविक किस तरह फंस रहे हैं.
ईरान के भीतर भी नेतृत्व के तेवर बेहद आक्रामक हैं. ईरान के नए सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने शनिवार को एक सार्वजनिक बयान जारी कर अमेरिकी धमकियों का जवाब दिया. उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरानी नौसेना अपने दुश्मनों को करारी शिकस्त देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है. ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका की आर्थिक और सैन्य नाकेबंदी जारी रहेगी, वह होर्मुज के रास्ते होने वाले व्यापार को बाधित करता रहेगा.
इस पूरे टकराव की जड़ में ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उसके पास मौजूद एनरिच्ड (संवर्धित) यूरेनियम का भंडार है. डोनाल्ड ट्रंप ने मांग की है कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को अपने नियंत्रण में लेगा, जिसे ईरान अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों देशों के बीच जारी सीजफायर 21 अप्रैल को समाप्त हो रहा है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे इस समय सीमा को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं. यदि 21 अप्रैल से पहले कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो खाड़ी क्षेत्र में सीधे सैन्य संघर्ष की शुरुआत हो सकती है. हालांकि, कूटनीतिक गलियारों से खबर है कि सोमवार को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की गुप्त वार्ता हो सकती है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज केवल एक जलमार्ग नहीं, बल्कि दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है. यदि यहां टकराव बढ़ा, तो न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमराएगी, बल्कि भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा का संकट खड़ा हो जाएगा. बहरहाल, आने वाले 48 घंटे यह तय करेंगे कि दुनिया एक और युद्ध की ओर बढ़ रही है या कूटनीति के जरिए शांति का रास्ता निकलेगा.
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