नई दिल्ली: सरकार ने बुधवार को प्रवासी भारतीयों (NRIs) को एयर इंडिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने की अनुमति दे दी. सरकार एयर इंडिया में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच रही है. PM नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय किया गया. सरकार एयर इंडिया में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने को लेकर प्रारंभिक बोली मंगाई है. इसमें शर्त यह है कि एयर इंडिया में अच्छा-खासा मालिकाना हक और प्रभावी नियंत्रण भारतीय नागरिकों के पास होना चाहिए. Also Read - Air India Booking: जिन लोगों की फ्लाइट हुई रद्द वो 24 अगस्त तक दोबारा ले सकते हैं टिकट, नहीं देना होगा एक्स्ट्रा चार्ज: एयर इंडिया

एक आधिकारिक बयान के अनुसार सरकारी एयरलाइन में विदेशी निवेश प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से 49 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए. इसमें विदेशी एयरलाइन की हिस्सेदारी शामिल है. इसमें शर्त यह है कि एयर इंडिया में अच्छा-खासा मालिकाना हक और प्रभावी नियंत्रण भारतीय नागरिकों के पास होना चाहिए. Also Read - Air India Ticket Booking New Rule: सुप्रीम कोर्ट का आदेश- विमान में इस सीट की बुकिंग जल्द ही होगी बंद

बयान में कहा गया है कि एनआरआई के लिए अनुसूचित हवाई परिवहन सेवा / घरेलू अनुसूचित यात्री एयराइन में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है, लेकिन एयर इंडिया के मामले में यह केवल 49 प्रतिशत है. Also Read - 25 मई से उड़ान भरने को तैयार एयर इंडिया के प्लेन, लेकिन इससे पहले इस मामले पर अदालत को देना होगा जवाब

इसमें कहा गया है, ”जो एनआरआई भारतीय नागरिक हैं, उन्हें एयर इंडिया में 100 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की मंजूरी देने के लिये केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एफडीआई नीति में संशोधन को अनुमति दी है. इससे प्रवासी भारतीय स्वत: मार्ग से 100 प्रतिशत तक एयर इंडिया में निवेश कर सकेंगे.”

बयान के अनुसार, एयर इंडिया में 100 प्रतिशत रणनीतिक निवेश के प्रस्ताव को देखते हुए सरकारी एयरलाइन में विदेशी निवेश को अन्य अनुसूचित एयरलाइन के समरूप लाया गया है. राष्ट्रीय एयरलाइन में सरकार का कोई मालिकाना हक नहीं होगा और यह पूर्ण रूप से निजी स्वामित्व में होगा.

बयान में कहा गया है कि इस संशोधन का मकसद एफडीआई नीति को उदार और सरल बनाना है ताकि देश में कारोबार सुगमता हो. इससे देश में एफडीआई प्रवाह बढ़ेगा.

इस बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि एयर इंडिया पर आज का निर्णय मील का पत्थर है. उन्होंने कहा कि एयरलाइन कंपनी निजी हाथों में आएगी, लेकिन यह यात्रियों को पूर्व की तरह सेवा देती रहेगी और इससे निवेश अवसर भी बढ़ेगा.

प्रवासी भारतीयों को 100 प्रतिशत निवेश की अनुमति देने से वृहद मालिकाना हक और प्रभावी नियंत्रण (एसओईसी) नियमों का उल्लंघन नहीं होगा. एनआरआई निवेश को घरेलू निवेश के रूप में लिया जाता है.

एसओईसी रूपरेखा का पालन वैश्विक स्तर पर एयरलाइन में किया जाता है. इसके तहत जो एयरलाइन किसी खास देश से दूसरे देशों के लिए उड़ान भरती है, उसमें वहां की सरकार या नागरिकों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी होनी चाहिए.

सूचना प्रसारण मंत्री जावड़ेकर ने कहा कि अनुबंध पर निर्माण, एकल ब्रांड खुदरा कारोबार और कोयला खनन जैसे क्षेत्रों में एफडीआई नियमों को ढील देने से देश में एफडीआई उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है और भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रमुख गंतव्य बन गया है.

जावड़ेकर ने कहा कि 2000 से 2014 के दौरान 360 अरब डॉलर का एफडीआई आया लेकिन पिछले पांच साल में ही यह 282 अरब डॉलर रहा. मंत्री ने कहा कि भारत धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से विनिर्माण केंद्र बन रहा है.