छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, इन छात्रों को दी राहत, जानें किसे नहीं मिलेगा फायदा
छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने FIR से राहत को लेकर बड़ा संकेत दिया है. जानें किन छात्रों को राहत मिलेगी और किन्हें नहीं? सरकार का रुख क्या है और इस मामले में अगली सुनवाई में किस बात पर चर्चा हो सकती है.
SC ने कहा उसका पिछला आदेश राज्यों के लिए किसी तरह की कानूनी बाधा नहीं बनेगा. (Photo from IANS)
दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में छात्र आंदोलन से जुड़े हजारों प्रदर्शनकारियों के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत वाली खबर सामने आई है. अदालत ने साफ किया कि जिन छात्रों या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पहले से हत्या, दुष्कर्म जैसे गंभीर आपराधिक मामले नहीं हैं, उन्हें आंदोलन में शामिल होने की वजह से अपराधी नहीं माना जाएगा. वहीं, जिन पर पहले से आपराधिक आरोप हैं या जिन्होंने प्रदर्शन की आड़ में हिंसा की, उन्हें फिलहाल राहत नहीं मिलेगी. अब इस मामले की अगली अहम सुनवाई 18 अगस्त को होगी.
कोर्ट ने राज्य सरकारों को केस बंद या वापस लेने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली समेत जिन राज्यों में छात्र आंदोलन के दौरान हिंसा हुई, वहां की सरकारें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को बंद करने या मुकदमे वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया अपना सकती हैं. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका पिछला आदेश राज्यों के लिए किसी तरह की कानूनी बाधा नहीं बनेगा.
SC ने समझाया - आपराधिक पृष्ठभूमि का मतलब
कोर्ट ने साफ किया कि आपराधिक पृष्ठभूमि का मतलब केवल ऐसे लोग हैं जिनके खिलाफ पहले से हत्या, दुष्कर्म या अन्य गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं. अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ पहले केवल राजनीतिक प्रदर्शन, धरना या सड़क दुर्घटना जैसे छोटे मामलों में FIR दर्ज हुई है, तो उसे इस श्रेणी में नहीं माना जाएगा. यानी ऐसे लोगों के खिलाफ सिर्फ इस आधार पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी.
सरकार बोली- कानूनी प्रक्रिया से वादा निभाएंगे
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने के अपने वादे पर कायम है. हालांकि, कानून के तहत सीधे FIR वापस लेने का प्रावधान नहीं है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर सकती है, सरकारी वकील अदालत से अभियोजन वापस लेने की अनुमति मांग सकते हैं या फिर अदालत खुद FIR रद्द कर सकती है. सरकार चाहती है कि आंदोलन के प्रतिनिधि और उनके वकील मिलकर इस प्रक्रिया पर सहमति बनाएं.
गंभीर मामलों में फंसे लोगों को राहत नहीं
तुषार मेहता ने साफ शब्दों में कहा कि जिन छात्रों का कोई गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके मामलों के समाधान के लिए सरकार तैयार है. लेकिन जिन लोगों के खिलाफ पहले से हत्या, बलात्कार जैसे गंभीर आरोप हैं या जिन्होंने आंदोलन के दौरान हिंसा की, उन्हें राहत नहीं मिलेगी. उन्होंने बताया कि सिर्फ जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े करीब 2,738 लोगों पर गंभीर आपराधिक मामलों के आरोप दर्ज हैं. ऐसे मामलों में सरकार बेहद सावधानी से कानूनी प्रक्रिया अपनाएगी.
याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?
वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत से कहा कि अगर हर छात्र के लिए अलग-अलग मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई गई, तो इसमें काफी समय लगेगा. इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कुछ समय मांगा और कहा कि सरकार सभी FIR का पूरा विवरण अदालत के सामने पेश करेगी. वहीं, जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अदालत ऐसी कानूनी व्यवस्था बनाने में मदद कर सकती है, जिससे FIR को व्यवस्थित तरीके से खत्म किया जा सके.
इस मामले में अब 18 अगस्त को होगी सुनवाई
अब इस मामले में 18 अगस्त को होने वाली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है. उम्मीद है कि उस दिन छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR खत्म करने की प्रक्रिया पर कोई स्पष्ट रास्ता सामने आएगा. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि न तो प्रदर्शनकारियों के साथ ज्यादती करने वाले पुलिसकर्मियों को बख्शा जाएगा और न ही आंदोलन की आड़ में हिंसा करने वाले आपराधिक तत्वों को.
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