इलाहाबाद: देश का सबसे बड़ा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ‘उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद’ (यूपी बोर्ड) भी अब नेशनल एकैडमिक डिपॉजिटरी (नैड) प्रणाली में शामिल होने को तैयार है. इस सम्बन्ध में माध्यमिक शिक्षा सचिव के पास प्रस्ताव भेजा गया है. इस प्रणाली के लागू होने के बाद आनलाईन डिपाजिटरी को इंटरनेट से कनेक्ट कर छात्र कभी भी और कहीं भी आधार या नैड पहचान अंक के जरिए अपनी डिग्री या डिप्लोमा देख सकेंगे.

डिजिटल डिपाजिटरी में रख सकेंगे मार्कशीट
नैड प्रणाली में शामिल होने पर यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों को अपने अंक पत्र, प्रमाण पत्र खोने की चिंता नहीं सताएगी और सीबीएसई बोर्ड की तरह इस बोर्ड के भी विद्यार्थी डिजिटल डिपाजिटरी में अपने अंक पत्र आदि रख सकेंगे. उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव के मुताबिक विभाग ने नैड प्रणाली में शामिल होने का प्रस्ताव शासन को भेजा है और जल्द ही मंजूरी मिलने की संभावना है.

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यूपी बोर्ड के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि एनडीएमएल के साथ डिपाजिटरी रखने पर विचार किया जा रहा है. बोर्ड के पास वर्ष 2003 से अब तक के सभी आंकड़े डिजिटल प्रारूप में मौजूद हैं जिन्हें इस डिपाजिटरी में एक साथ अपलोड किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 से पूर्व के आंकड़े चूंकि डिजिटल प्रारूप में नहीं हैं, इसलिए बाद में इसे डिजिटल प्रारूप में परिवर्तित करने पर विचार किया जाएगा. उल्लेखनीय है कि नैड के तहत एनडीएमएल और सीवीएल को एकैडमिक डिपाजिटरी के तौर पर चुना गया है.

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डॉक्यूमेंट सत्यापन की लंबी प्रक्रिया से बच सकेंगे छात्र
गौरतलब है कि सीबीएसई, आईसीएसई और राज्य बोर्ड से प्रत्येक वर्ष तकरीबन 3.5 करोड़ विद्यार्थी माध्यमिक (हाईस्कूल और इंटरमीडिएट) की परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं. जिसमें मात्र यूपी बोर्ड से ही हर साल 65-70 लाख विद्यार्थी माध्यमिक की परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं. बता दें कि भारत सरकार ने सभी शैक्षणिक अंक पत्रों और प्रमाण पत्रों को नैड के माध्यम से डिजिटाइज करने का निर्णय किया है. इसके तहत छात्रों को दी जाने वाली डिग्री, डिप्लोमा, अंक पत्रों और प्रमाण पत्रों को सीधा नैड में अपलोड कर दिया जाएगा.

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उन्होंने कहा कि इस आनलाईन डिपाजिटरी को कहीं से भी और कभी भी इंटरनेट से कनेक्ट कर छात्र अपने आधार या नैड पहचान अंक के जरिए अपनी डिग्री या डिप्लोमा को देख और डाउनलोड कर सकेंगे और साथ ही नियोक्ता को इसे जांचने की अनुमति देकर सत्यापन की लंबी प्रक्रिया से बच सकेंगे.

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की इस पहल से अंक पत्रों, प्रमाण पत्रों आदि के खोने, चोरी होने या खराब होने की संभावना खत्म हो जाएगी. वहीं दूसरी ओर, पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी के लिए इंटरव्यू देने या विदेश जाने के लिए वीजा प्राप्त करने के दौरान प्रमाण पत्रों को अपने साथ लाने का झंझट नहीं होगा. (इनपुट भाषा )