देशभर में छात्र क्यों कर रहे हैं आत्महत्या? SC ने जारी की गाइडलाइन, जानें UMMEED मॉडल कैसे मदद करेगा

Students Suicides: देशभर से स्टूडेंट्स सूसाइड के कई मामले बीतें कुछ दिनों से सुनने को मिल रही है. इन बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त निर्देश जारी किए हैं, ताकि इन मामलों पर काबू पाया जा सके.आइए जानते हैं कैसे रुकेंगे यह बढ़ते मामले?

Published date india.com Published: November 22, 2025 11:16 PM IST
Student Suicides In India Reasons And Solutions
Student Suicides In India Reasons And Solutions

देशभर से स्टूडेंट्स सूसाइड के कई मामले बीतें कुछ दिनों से सुनने को मिल रही है. इस तरह के मामले इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि इसका अंदाजा आप ऐसे लगा सकते हैं कि मध्य प्रदेश में क्लास 11 की एक 17 साल की लड़की ने घर पर फांसी लगाकर जान दे दी.उसने अपने सुसाइड नोट में टीचर पर गलत तरीके से हाथ पकड़ने और टॉर्चर करने का आरोप लगाया. यह घटना यहीं नहीं रुकी दिल्ली में क्लास 10वीं का 16 साल का लड़का मेट्रो के सामने कूद गया.सुसाइड नोट में स्कूल टीचर्स पर मेंटल हरासमेंट का इल्जाम लगाया. ऐसे कई मामलें हर दिना सामने आ रहे हैं, जोकि काफी चिंताजनक है. इन मामलों ने देशभर में हड़कंप मचा दिया, जिससे पैरेंट्स के बीच एक डर बैठ गया है कि कहीं उनके बच्चें भी ऐसा गलत कदम ना उठा लें.

कैसे रुकेंगी यह घटनाएं, NEP2020 क्यों है जरूरी

इन तमाम घटनाओं में गौर करने वाली बात है कि जिन बच्चों ने आत्माहत्या का रास्ता अपनाया उनके बीच स्कूलों में बुलिंग, टीचर का गलत बर्ताव और मेंटल प्रेशर एक बड़ी वजह थी, जो हर इंसान के लिए काफी खतरनाक है. छोटे बच्चों व स्टूडेंट्स के बीच इस तरह की घटनाएं उन्हें मेंटली कमोजर करती हैं, जिसके बाद वह गलत रास्ता अपनाते हैं.

हालांकि, बच्चों को बेहतर शिक्षा देने और उनकी सेहत का ख्याल रखने के लिए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 साफ बताती है कि पढ़ाई सिर्फ मार्क्स की रेस हासिल करने से नहीं, बल्कि बच्चे का पूरा विकास होना चाहिए. ऐसी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए हर स्कूल-कॉलेज में काउंसलिंग सिस्टम अनिवार्य, स्पोर्ट्टर्स, आर्ट्स, योगा, म्यूजिक और कम्युनिटी एक्टिविटीज को बढ़ावा देना ताकि बच्चे सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें. साथ ही बच्चों के बीच हैपीनेस और वेलनेस प्रोग्राम चलाना, पीयर सपोर्ट और लोकल भाषाओं में पढ़ाई करवाना ताकि उनके बीच स्ट्रेस कम हो. यह तमाम होलिस्टिक डेवलपमेंट का हिस्सा है जो बच्चों को मेंटली मजबूत बनाता है.

बच्चों के लिए शिक्षा मंत्रालय ने जारी की थी UMMEED मॉडल, लेकिन असर…

साल 2023 में शिक्षा मंत्रालय ने UMMEED ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की जिसका मतलब है Understand, Motivate, Manage, Empathise, Empower, Develop. यह मॉडल इस बात को जोर देती है कि Every Child Matters. इस पॉलिसी के तहत स्कूल में टीचर्स, पैरेंट्स और स्टूडेंट्स मिलकर एक सकारात्मक माहौल बनाने के लिए काम करेंगे. हर स्कूल में स्कूल वेलनेस टीम बनाना जरूरी है, जो जोखिम वाले बच्चों की पहचान कर सके और योगा, स्पोर्ट्स, काउंसलिंग जैसी गतिविधियों के जरिए उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए. साथ ही, टीचर्स और पैरेंट्स को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे मूड स्विंग, अचानक अकेलापन, व्यवहार में बदलाव, नींद या भूख कम होना जैसे वॉर्निंग साइन्स पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर तुरंत सपोर्ट दे सकें. साथ ही इस पॉलिसी में यह भी बताया गया है कि यदि बच्चा खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करे तो इमरजेंसी रिस्पॉन्स कैसे करना है, इसकी गाइडलाइन भी इसमें शामिल है. हर साल सुधार की समीक्षा अनिवार्य है और सुसाइड से जुड़े मिथकों को दूर करने पर भी खास फोकस किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

ऐसे मामलों को रोकने के लिए SC ने 15 देशव्यापी गाइडलाइंस जारी किए हैं जो तब तक लागू रहेंगे जब तक नया कानून न बने. इसके तहत सभी स्कूल, कॉलेज, कोचिंग, हॉस्टल पर लागू हैं.इसकी मुख्य बात यह है कि हर इंस्टीट्यूशन में UMMEED, मनोदर्पण और नेशनल सुसाइड प्रिवेंशन स्ट्रेटजी से इंस्पायर्ड यूनिफॉर्म मेंटल हेल्थ पॉलिसी बनानी होगी. सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइंस के अनुसार हर स्कूल और कॉलेज को हर साल मानसिक स्वास्थ्य पॉलिसी का रिव्यू करके अपनी वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा. जिन स्कूलों में 100 से ज्यादा छात्र हैं, वहां कम से कम एक क्वालिफाइड काउंसलर होना जरूरी है, जबकि छोटे स्कूलों में रेफरल सिस्टम लागू किया जाएगा. स्टूडेंट–काउंसलर रेशियो संतुलित रखना होगा, परीक्षा के समय छात्रों को पर्सनल मेंटर दिया जाएगा और बैच रैंक या पब्लिक शेमिंग जैसी प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक होगी.

इन बातों का ख्याल रखने के दिए सख्त निर्देश

साथ ही इस बात पर भी जोर दी गई कि हेल्पलाइन नंबर हर जगह बड़े अक्षरों में लगाए जाएंगे, हॉस्टल में टेंपर-प्रूफ फैन और छत–बालकनी पर सुरक्षित लॉक अनिवार्य किए जाएंगे, खासकर कोटा, जयपुर और दिल्ली जैसे कोचिंग हब्स में ज्यादा सुरक्षा आवश्यक होगी. टीचर्स को साल में दो बार ट्रेनिंग दी जाएगी और रैगिंग या हरासमेंट पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी, साथ ही कन्फिडेंशियल शिकायत सिस्टम और हर साल अनॉनिमस रिपोर्ट सबमिट करना होगा. करियर काउंसलिंग में पैरेंट्स की भागीदारी जरूरी होगी. ये सभी नियम छात्रों की मानसिक सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं, इसलिए पैरेंट्स भी सुनिश्चित करें कि स्कूल इन्हें लागू करे, और अगर कोई बच्चा स्ट्रेस में हो तो तुरंत मनोदर्पण हेल्पलाइन या काउंसलर से संपर्क किया जाए क्योंकि जिंदगी अनमोल है और सही कदम समय पर सब बचा सकता है.

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source

Also Read:

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.