नई दिल्लीः संविधान के तहत अनुसूचित जाति जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण जारी रखने की प्रतिबद्धता जताते हुए सरकार ने शुक्रवार को कहा कि ओबीसी को उपवर्गों में बांटने के बारे में बनाई गई समिति को उसकी सिफारिशें देने के लिए 31 मई 2019 तक का समय बढ़ा दिया गया है. प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह ने राज्यसभा में आरक्षण संबंधी भाजपा के डॉ. विकास महात्मे के निजी संकल्प पर हुई चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए यह बात कही.

उन्होंने कहा कि आरक्षण जारी रखने के बारे में सरकार की प्रतिबद्धता को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण के तहत उपवर्गीकरण की जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है.

सिंह ने कहा कि इस समिति को उसकी सिफारिशें देने के लिये समय अवधि को 31 मई 2019 तक बढ़ा दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस समिति की रिपोर्ट आने से ओबीसी उपवर्गीकरण के मुद्दे पर निर्णय करने में ओबीसी आयोग को मदद मिलेगी. मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार आरक्षण से जुड़े सभी मुद्दों पर खुले मन से विचार करने को तैयार है. उन्होंने महात्मे से उनका निजी संकल्प वापस लेने का अनुरोध किया.

सिंह के अनुरोध पर महात्मे ने संकल्प वापस ले लिया. इससे पहले उन्होंने संकल्प पेश करते हुये कहा कि आबीसी के उपवर्गीकरण की जांच हेतु पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा तैयार परामर्श पत्र के अनुसार पांच सालों में केन्द्र सरकार की 1.3 लाख नौकरियों और तीन सालों में केन्द्रीय शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के दाखिले में 97 प्रतिशत लाभ 25 प्रतिशत जातियों को मिला. जबकि 37 प्रतिशत ओबीसी समूहों को बिल्कुल लाभ नहीं मिला.

इसके अधार पर उन्होंने ‘‘भारित सूचकांक पद्धति’’ नामक नयी पद्धति से आरक्षण के व्यावहारिक लाभ को सुनिश्चित करने की मांग का संकल्प प्रस्तुत किया. चर्चा में कांग्रेस के बी के हरिप्रसाद और एल हनुमन्थैया, भाजपा के शंभुप्रसाद तुंडिया और रामकुमार वर्मा, सपा के विश्वंभर प्रसाद निषाद और जावेद अली, राजद के मनोज झा और आप के संजय सिंह ने हिस्सा लेते हुये आरक्षण का संवैधानिक मंतव्य हासिल होने तक इसे जारी रखने का सुझाव दिया.

(इनपुट-भाषा)