नई दिल्ली: बुधवार को आए उपचुनाव के नतीजों से उत्साहित कांग्रेस पार्टी के लिए इसमें खुश होने को ज्यादा कुछ नहीं है. सिवाय इसके कि बिहार में वह महागठबंधन में शामिल है. जीत गैर भाजपाई दलों की हुई है. कांग्रेस के प्रत्याशी तो उत्तरप्रदेश की दोनों लोकसभा सीटों पर अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए. फिर भी वह खुश है क्योंकि उसे इन नतीजों में 2019 के चुनावों में सक्सेस का फॉर्मूला दिख रहा है. यह शायद सही भी हो, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि दूसरी विपक्षी पार्टियां इसके लिए कितनी तैयार हैं. एक दिन पहले सोनिया गांधी की डिनर पार्टी में 17 गैर भाजपाई दलों के प्रतिनिधि जरूर शामिल हुए, लेकिन बुधवार को नतीजे आने के बाद अखिलेश यादव ने 2019 के चुनाव में गठबंधन की संभावनाओं पर चुप्पी साध ली. हालांकि, बुधवार की शाम मायावती के घर बुआ-भतीजे की मुलाकात के बाद इसको लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया जरूर सहयोगात्मक है, लेकिन वामपंथी पार्टियों के साथ आने में उनकी असहजता का अंदाजा लगाया जा सकता है. 

इससे पहले, उत्तर प्रदेश और बिहार में लोकसभा उपचुनाव के नतीजों से उत्साहित विपक्षी दलों ने बुधवार को कहा कि यह जनादेश भाजपा के खिलाफ ‘जनाक्रोश’ का संकेत है. यह केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी के अंत की शुरुआत भी है. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर एवं फूलपुर संसदीय क्षेत्र तथा बिहार के अररिया संसदीय क्षेत्र एवं भभुभा एवं जहानाबाद विधानसभा क्षेत्र में हुए उपचुनाव के लिए आज मतगणना हुई. भभुआ सीट को छोड़कर अन्य सभी सीटों पर गैर भाजपाई प्रत्याशियों की जीत हुई.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने उपचुनावों के नतीजों के बारे में कहा कि मतदाताओं में भाजपा के प्रति बहुत गुस्सा है. राहुल ने ट्वीट कर कहा, ‘‘ आज के उपचुनावों में जीतने वाले उम्मीदवारों को बधाई.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ नतीजों से स्पष्ट है कि मतदाताओं में भाजपा के प्रति बहुत क्रोध है और वो उस गैर भाजपाई उम्मीदवार के लिए वोट करेंगे जिसके जीतने की संभावना सबसे ज़्यादा हो.

राहुल ने यह भी कहा, ‘‘ कांग्रेस यूपी में नवनिर्माण के लिए तत्पर है, लेकिन ये रातों रात नहीं होगा.’’ कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि अब भाजपा का लोकसभा में साधारण बहुमत नहीं रहा. उसके सदस्यों की संख्या 271 हो गई है. हालांकि लोकसभा सचिवालय के मुताबिक भाजपा के 274 सदस्य हैं और पार्टी को अपने दम पर साधारण बहुमत के लिए 272 सीटों की जरूरत है.

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने उत्तर प्रदेश और बिहार में हुए उपचुनावों के नतीजे आने के तुरन्त बाद ट्वीट कर कहा कि अंत की शुरुआत हो चुकी है. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी( बसपा) की प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव को बधाई दी.

भाजपा के साथ गठबंधन के फैसले पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से रिश्ता तोड़ने वाले शरद यादव ने दावा किया कि बिहार और उत्तरप्रदेश में उपचुनावों में राजग की चुनावी हार से उनके रुख की पुष्टि हुई. जदयू के प्रमुख नीतीश कुमार पर कटाक्ष करते हुए यादव ने कहा कि जनादेश को कुचलने वालों और पाला बदलने वालों की हार हुई. यादव ने कहा कि नतीजा दिखाता है कि महागठबंधन बरकरार है.

समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के नतीजों को केन्द्र और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों के खिलाफ जनादेश करार देते हुए इसके लिए बसपा और राष्ट्रीय लोकदल समेत तमाम सहयोगी दलों को धन्यवाद दिया. अखिलेश ने संवाददाताओं से कहा कि वह सबसे पहले बसपा नेता मायावती का बहुत-बहुत धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने देश की महत्वपूर्ण लड़ाई में सपा का सहयोग और समर्थन किया. साथ ही राष्ट्रीय लोकदल, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, निषाद पार्टी, पीस पार्टी और वामदलों का भी धन्यवाद दिया.

उपचुनाव नतीजों पर कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भाजपा की जुमलेबाजी, उसकी किसान- नौजवान- महिला विरोधी नीति को आज देश की जनता पहचान गई है. उन्होंने कहा, ‘‘ आप देखते जाइये.. चाहे राजस्थान के उपचुनाव रहे हों, मध्य प्रदेश के हों या अब उत्तर प्रदेश और बिहार के उप- चुनाव हों, बदलाव आ चुका है.’’ माकपा के सांसद मोहम्मद सलीम ने भी उपचुनाव के नतीजों का स्वागत किया और कहा कि इसका प्रभाव अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनावों पर भी पड़ेगा. भाकपा नेता डी राजा ने कहा कि परिणामों से पता चलता है कि भाजपा अपराजेय नहीं है.