suicide cases: हिमाचल प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के पहले तीन माह में राज्य में आत्महत्या के मामले उसके पहले के तीन महीनों के मुकाबले दोगुना रहे. Also Read - नगमा ने NCB पर उठाए सवाल, ड्रग्स के लिए कंगना को समन क्यों नहीं भेजती?

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी. Also Read - ड्रग्स केस में 'छपाक': दीपिका आज गोवा से लौटेंगी वापस, कल NCB के सवालों के चलेंगे बाण

राज्य पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में आत्महत्या के 40 मामले सामने आए, फरवरी में 45 और मार्च में आत्महत्या के 32 मामले सामने आए. अप्रैल में 47 लोगों ने आत्महत्या की, मई में 89 लोगों ने आत्महत्या की,जून में 112 और जुलाई में 101 लोगों ने आत्महत्या की. Also Read - Coronavirus: कोविड-19 से लड़ने के उपायों के लिए पीएम मोदी ने सीएम योगी की सराहना में कही ये बात

इस प्रकार से जनवरी से मार्च तक आत्महत्या के 117 मामले सामने आए वहीं अप्रैल से जून तक आत्महत्या के 248 मामले सामने आए. राज्य में 24 मार्च को लॉकडाउन लागू हुआ था.

पुलिस महानिदेशक संजय कुंडू ने कहा, “लॉकडाउन के दौरान आत्महत्या की घटनाएं बढ़ी है और यह चिंता का विषय है.” कुंडू ने 30 मई को डीजीपी का पदभार संभाला है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामलों में आत्महत्या के सही कारणों का पता ही नहीं चला है.

उन्होंने कहा कि परिवार और नौकरी संबंधी समस्याओं के कारण अधिक संख्या में गृहिणियों और मजदूरों ने आत्महत्या की. वहीं परीक्षा में अपनी उम्मीदों पर खरे नहीं उतरने पर छात्रों ने और बीमारियों से पीड़ित बुजुर्गों ने आत्महत्या की.

डीजीपी ने कहा कि चंबा की 13 वर्षीय एक छात्रा ने कक्षा दसवीं के परीक्षा परिणाम आने के बाद फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. उन्होंने कहा कि आत्महत्या करने वाली वह सबसे कम उम्र की व्यक्ति है.

कुंडू ने कहा कि पुलिस विभाग ने आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों का मुद्दा स्वास्थ्य विभाग और गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के समक्ष उठाया है ताकि वे लोगों में जागरुगता फैलाने में मदद कर सकें.