नई दिल्ली: केंद्र सरकार एयरफोर्स की मारक क्षमता को बढ़ाने के काम में तेजी ला रही है. एक बार जब यह परियोजना पूरी हो जाएगी तो वायु सेना की लंबी दूरी से समुद्र या जमीन में किसी भी लक्ष्य को भेदने की शक्ति कई गुना बढ़ने की संभावना है. सूत्रों ने बताया कि सरकार वायु सेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है.बालाकोट हवाई हमलों के कई दिनों बाद सरकार ने 40 से अधिक सुखोई-30 लड़ाकू विमानों को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस करने की प्रक्रिया तेज करने का फैसला किया है. आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को बताया कि गहन निगरानी वाली इस रणनीतिक परियोजना का मकसद भारतीय वायु सेना की युद्धक क्षमताओं को मजबूत करना है. Also Read - अब से देश के जवानों को मिलेगा हर टोल प्लाजा पर सम्मान, NHAI ने जारी किया नया सर्कुलर

सूत्रों ने बताया कि सरकार वायु सेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने के लिए कई कदम उठा रही है. एचएएल को खासतौर से ब्रह्मोस परियोजना में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त मानवश्रम और संसाधनों को लगाने के लिए कहा गया है. एक बार जब यह परियोजना पूरी हो जाएगी तो वायु सेना की लंबी दूरी से समुद्र या जमीन में किसी भी लक्ष्य को भेदने की शक्ति कई गुना बढ़ने की संभावना है. Also Read - IAF की गलती का शिकार हुए वायुसेना के पायलटों को किया जाएगा गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित

40 सुखोई विमानों के बेड़े को मिसाइलों से लैस करने के लिए, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में उनके संरचनात्मक संशोधन किए जा रहे हैं. ब्रह्मोस मिसाइल भारत के सुखोई-30 लड़ाकू विमान पर तैनात किया जाने वाला सबसे भारी हथियार है. Also Read - अभिनंदन से प्रेरित कंगना रनौत ने लिया यह फैसला, जल्द ही उडाएंगी तेजस, जानें क्या है पूरा मामला

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) और ब्रह्मोस एयरोस्पेस लिमिटेड को यह परियोजना शीघ्र लागू करने के लिए कहा गया है, ताकि दिसंबर 2020 की निर्धारित समयसीमा से पहले इसे पूरा किया जा सके. साल 2016 में सरकार ने 40 से अधिक सुखोई लड़ाकू विमानों में दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल तैनात करने का फैसला किया था.

सूत्रों ने बताया कि हालांकि, प्रोजेक्‍ट पर असली काम 2017 के अंत तक शुरू हुआ, हालांकि इसका कार्यान्वयन काफी धीमा है. उन्होंने बताया कि बालाकोट हवाई हमलों और इसके बाद पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई की पृष्ठभूमि में भारतीय वायु सेना को मजबूत करने के तरीकों की समीक्षा की गई और यह महसूस किया गया कि सुखोई विमानों को ब्रह्मोस से जल्द से जल्द लैस करना प्राथमिकता होनी चाहिए.