नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने कांग्रेस नेता शशि थरूर को उनकी पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत के मामले में नियमित जमानत दे दी. तिरूवनंतपुरम से सांसद को मामले में एक आरोपी के तौर पर समन किया गया था. थरूर अदालत के समक्ष पेश हुए और बताया कि मामले में एक सत्र अदालत ने पहले ही उन्हें पांच जुलाई को अग्रिम जमानत दे दी है. अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटिन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने इसके बाद एक लाख रूपये की जमानत राशि और इतनी ही रकम का मुचलका जमा कराने को कहा जैसा कि सत्र अदालत ने निर्देश दिया था. इसके बाद उन्होंने अंतरिम राहत को नियमित जमानत में बदल दिया. गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए थरूर अग्रिम जमानत के लिये सत्र अदालत गए थे. सुनंदा पुष्कर 17 जनवरी 2014 को दिल्ली के एक लग्जरी होटल के सुइट में मृत मिली थीं. थरूर दंपति होटल में रह रहे थे क्योंकि उनके आधिकारिक बंगले में मरम्मत का काम हो रहा था. Also Read - कोरोना संक्रमित मनीष सिसोदिया को डेंगू भी, प्लेटलेट्स घटने पर LNJP से मैक्‍स अस्‍पताल में शिफ्ट

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इससे पहले गुरुवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान स्पेशल जज ने एक लाख रुपए के निजी मुचलके पर उन्हें अग्रिम ज़मानत दी और कहा कि वो सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश नहीं कर सकते और बिना कोर्ट की इजाजत के देश से बाहर नहीं जा सकते. गौरतलब है कि चार्जशीट में कांग्रेस नेता थरूर पर अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने (आईपीसी 306) और वैवाहिक जीवन में क्रूरता यानी 489A के तहत आरोप किए गए हैं. गौरतलब है कि सुनंदा 17 जुलाई 2014 को दिल्ली के एक आलीशान होटल के कमरे में मृत पाई गई थीं. यह दंपति उस समय होटल में ठहरा हुआ था क्योंकि उनके सरकारी बंगले की मरम्मत हो रही थी.

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विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार ने थरूर को एक लाख रूपये के निजी मुचलके पर जमानत दी. साथ ही उन्हें साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने और बिना अनुमति के देश नहीं छोड़ने के निर्देश भी अदालत ने दिए. अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की इन आशंकाओं का कोई आधार नहीं है कि थरूर विदेश भाग जाएंगे या गवाहों को प्रभावित करेंगे.अदालत ने ध्यान दिलाया कि जांच एजेंसी ने थरूर को गिरफ्तार नहीं किया और जब भी पुलिस ने जांच के लिए उन्हें तलब किया तो उन्होंने सहयोग दिया. उसने यह भी ध्यान दिलाया कि थरूर ने कभी न्याय तंत्र से बचने अथवा अन्य देश में बस जाने का प्रयास नहीं किया.

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अदालत ने अपने सात पृष्ठों के आदेश में ध्यान दिलाया कि थरूर लोकसभा के सदस्य हैं तथा संप्रग शासन के दौरान विदेश राज्य मंत्री थे.थरूर ने अपनी जमानत याचिका में कहा था कि मामले में आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है और एसआईटी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जांच पूरी हो गयी है और हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जरूरत नहीं है.अदालत ने पांच जून को थरूर को समन जारी कर उन्हें सात जुलाई को पेश होने को कहा था और माना था कि उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के पर्याप्त आधार हैं.