नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने 2017 की एसएससी परीक्षओं को रद्द करने की हिमायत करते हुए कहा कि छात्रों के हितों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) या सीबीएसई नये सिरे से इनका आयोजन कर सकती है. इससे पहले, अगस्त महीने में न्यायालय ने इस परीक्षा के नतीजों पर रोक लगा दी थी. शीर्ष अदालत ने कहा कि इन परीक्षाओं में हुई अनियमित्ताओं के असली लाभार्थी का पता लगाना मुश्किल है और इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए.

न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने केन्द्र की इस दलील से असहमति व्यक्त की कि तकनीकी गड़बड़ी की वजह से फरवरी में सम्पन्न परीक्षायें ‘दागी’ हो गयी थीं और इसके बाद एक प्रश्न पत्र की फिर से परीक्षा हुयी थी. पीठ ने केन्द्र से कहा कि वह प्रगति रिपोर्ट के अवलोकन के बाद 13 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करे. पीठ ने कहा कि ‘हमने इस परीक्षा के नतीजों की घोषणा पर रोक लगा दी थी क्योंकि ऐसा करने के लिये पहली नजर में सामग्री थी. यह छात्रों के हित में होगा कि इसे पूरी तरह निरस्त करके नये सिरे से इसका आयोजन किया जाए.’

एसएससी सीजीएल की परीक्षा के प्रश्न पत्र कथित रूप से लीक होने की वजह से कई दिन तक इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ था. पीठ ने कहा कि वह समझती है कि गंभीर छात्रों ने रात रात भर पढ़ाई की थी परंतु न्यायालय प्रश्न पत्र लीक होने से लाभ प्राप्त करने वालों को व्यवस्था में शामिल नहीं होने दे सकती. पीठ ने कहा कि वह राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेन्सी या सीबीएसई से परीक्षा आयोजित करने के लिये कह सकती है. पीठ ने कहा कि हम ऐसी एजेन्सी से परीक्षा का आयोजन कराना चाहते हैं जिससे संपर्क नहीं किया जा सके.’