बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आधार कार्ड को बताया वैध दस्तावेज, सियासी हलचल तेज

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR मामले में बड़ा आदेश दिया है. अब आधार कार्ड को भी पहचान दस्तावेज के रूप में मान्यता मिलेगी. इस खबर में जानिए सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग ने क्या दलीलें दीं?

Published date india.com Published: September 8, 2025 4:04 PM IST
बिहार SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, आधार कार्ड को बताया वैध दस्तावेज, सियासी हलचल तेज

बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा मतदाता सूची में किसी भी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए आधार कार्ड को भी मान्यता दी जाएगी. अब तक पहचान के लिए 11 दस्तावेज मान्य थे, लेकिन अब आधार को ’12वें दस्तावेज’ के रूप में जोड़ा गया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि आधार नागरिकता साबित करने का दस्तावेज नहीं है यानी आधार केवल पहचान और निवास का सबूत होगा, लेकिन यह यह साबित नहीं करेगा कि कोई व्यक्ति भारत का नागरिक है या नहीं.

आधार पर सुप्रीम कोर्ट का बयान

कोर्ट में सुनवाई के दौरान, जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कोई भी अदालत अवैध प्रवासियों को मतदाता सूची में शामिल करने की अनुमति नहीं दे रही है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार को केवल पहचान और पते के प्रमाण के तौर पर देखा जाएगा. चुनाव आयोग को भी यह अधिकार रहेगा कि वह आधार कार्ड की प्रामाणिकता की जांच करे, ताकि फर्जी या अवैध दस्तावेजों का इस्तेमाल न हो सके कोर्ट ने सवाल किया कि अगर पहले से 11 दस्तावेज मान्य हैं, तो आधार को बारहवें दस्तावेज के रूप में जोड़ने में समस्या क्यों होनी चाहिए?

चुनाव आयोग का तर्क समझें

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बिहार में कुल 7.24 करोड़ मतदाताओं में से 99.6 प्रतिशत लोगों ने पहले ही पहचान से जुड़े दस्तावेज जमा कर दिए हैं यानी अब केवल बहुत ही कम संख्या में लोग ऐसे हैं जिन्होंने दस्तावेज नहीं दिए हैं. आयोग ने यह भी कहा कि पहले के आदेश में लगभग 65 लाख लोगों के लिए आधार कार्ड को पहचान दस्तावेज के रूप में मान्यता दी गई थी. इसके बाद किसी भी याचिकाकर्ता ने यह शिकायत नहीं की कि बड़ी संख्या में लोग गलत तरीके से मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं.

अगली सुनवाई 15 सितंबर को

इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची में निष्पक्षता और पारदर्शिता जरूरी है. अदालत ने माना कि आधार को मान्यता देने से उन लोगों को सुविधा मिलेगी जिनके पास अन्य दस्तावेज नहीं हैं. हालांकि, यह किसी भी तरह से नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा. अदालत ने साथ ही यह भी कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी अवैध प्रवासी मतदाता सूची में शामिल न हो. अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी और तब तक आयोग को जरूरी कदम उठाने होंगे

(इनपुट-एजेंसी के साथ)

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