नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में प्रस्तावित भाजपा की रथ यात्रा पर मंगलवार को अस्थायी रोक लगा दी और पार्टी से कहा कि वह राज्य की ममता बनर्जी सरकार के समक्ष पुनरीक्षित प्रस्ताव देकर नए सिरे से मंजूरी मांगे. न्यायालय ने कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़ी राज्य सरकार की आशंकाएं पूरी तरह निराधार नहीं हैं. बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई को गणतंत्र बचाओ यात्रा के तहत अपनी प्रस्तावित सार्वजनिक रैलियों और बैठकों को जारी रखने की इजाजत दी. रथ यात्रा को लेकर पीठ ने राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार से कहा कि वह बीजेपी के ताजा और पुनरीक्षित प्रस्ताव पर विचार करे और ऐसा करते वक्त संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति एवं भाषण की स्वतंत्रता का ख्याल रखे.

पूरे राज्य में रथ यात्रा निकालने के लिए अधिकारियों की ओर से मंजूरी नहीं दिए जाने को लेकर प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, प्रस्तावित रथ यात्राओं के ब्योरे और राज्य सरकार के 14 जनवरी 2019 के आदेश को देखकर हम नहीं कह सकते कि राज्य सरकार की ओर से व्यक्त की गई आशंकाएं पूरी तरह निराधार हैं.

पीठ ने कहा, राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार का काम है और आदेश में व्यक्त की गई आशंकाओं का समाधान याचिकाकर्ता को तार्किक तरीके से करना होगा. न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने राज्य सरकार की इस दलील पर गौर किया कि जनसभाएं और रैलियों के आयोजन पर उसे कोई ऐतराज नहीं है और उसने तो भाजपा से सिर्फ ऐसे आयोजनों का ब्योरा और कार्यक्रम मांगा था.

पीठ ने कहा, ”प्रस्ताव सौंप देने पर राज्य सरकार मामले पर विचार करे इस बात को ध्यान में रखते हुए उचित आदेश पारित करे कि मौजूदा मामले में भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत दिए गए मौलिक अधिकारों का मामला शामिल है. हम राज्य सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वह प्रस्ताव मिलने पर इसी भावना से विचार करेगी.”

शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकार को भाजपा के पुनरीक्षित प्रस्ताव पर काफी तेजी से विचार करना होगा और ऐसा करते हुए सीबीएसई एवं अन्य बोर्ड परीक्षाओं का ध्यान रखना होगा और लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई जा सकती है.

भाजपा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने बहस की शुरुआत में कहा कि राज्य सरकार के अधिकारी अनुमति नहीं दे रहे और कह रहे हैं कि कुछ जगहों पर यात्रा की प्रवृति सांप्रदायिक और कुछ जगहों पर राजनीतिक होगी.

इससे पहले, शीर्ष अदालत ने पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा आयोजित करने के लिए भाजपा की याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा था. भाजपा की प्रदेश इकाई ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ के 21 दिसंबर, 2018 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसने उसकी रथ यात्रा को अनुमति देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को निरस्त कर दिया था.

इस मामले से जुड़े एक वकील ने बताया कि भाजपा ने अब अपना गणतंत्र बचाओ यात्रा कार्यक्रम 40 दिन से घटाकर 20 दिन कर दिया है और अब उसकी यात्राएं मुर्शिदाबाद के बहरामपुर, दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर, मेदिनीपुर और कोलकाता उत्तर संसदीय क्षेत्र से शुरू होंगी.

इस वकील ने बताया कि स्कूलों की आगामी परीक्षाओं और आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है.

इससे पहले, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने राज्य में रैली निकालने की अनुमति के लिए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी. इस आयोजन के माध्यम से राज्य के 42 संसदीय क्षेत्रों में सभाएं आयोजित की जानी थीं. भाजपा का कहना था कि शांतिपूर्ण तरीके से यात्राएं आयोजित करना उसका मौलिक अधिकार है जिससे उसे वंचित नहीं किया जा सकता.

भाजपा ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार बार-बार नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर हमला कर रही है, जिसकी वजह से राज्य सरकार की गतिविधियों को चुनौती देते हुए अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं.

भाजपा ने दावा किया था कि पहले भी कई बार अंतिम क्षणों में उसे अनुमति देने से इनकार किया जा चुका है . भाजपा का आरोप है कि 2014 से ही राज्य में पार्टी राजनीतिक प्रतिशोध का सामना कर रही है.