नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि राम-जन्मभूमि बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले से संबंधित पक्ष यदि इसे मुद्दे मध्यस्थता के जरिए सुलझाना चाहते हैं, तो वे अब भी ऐसा कर सकते हैं. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि उसे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एफएमआई कलीफुल्ला का पत्र मिला है जिसमें कहा गया है कि कुछ पक्षों ने उन्हें मध्यस्थता प्रक्रिया पुन: आरंभ करने के लिए पत्र लिखा है. कलीफुल्ला ने मामले में तीन सदस्यीय मध्यस्थता पैनल की अगुवाई की थी.

पीठ ने कहा कि भूमि विवाद मामले में रोजाना के आधार पर कार्यवाही बहुत आगे पहुंच गई है और यह जारी रहेगी. हालांकि अदालत ने कहा कि न्यायमूर्ति कलीफुल्ला की अगुवाई में मध्यस्थता प्रक्रिया अब भी जारी रह सकती है और उसकी कार्यवाही गोपनीय रखी जाएगी.

इस बीच चीफ जस्टिस ने कहा कि दोनों पक्ष इस मामले में बहस 18 अक्टूबर तक पूरा करने की कोशिश करें. उन्होंने दोनों पक्षों की ओर से बहस के लिए और समय मांगगे पर यह बात कही. अयोध्या विवाद पर मुस्लिम ने बहस के लिए दो हफ्ते का समय मांगा. चीफ जस्टिस ने कहा कि 18 अक्टूबर के बाद उन्हें चार हफ्ते का समय चाहिए.