'मंदिर हो या दरगाह, सड़क के बीच धार्मिक संरचना को...' बुलडोजर एक्शन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

Bulldozer Action: सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में बुलडोजर एक्शन को लेकर गाइडलाइंस तय करने को लेकर जारी आदेश सुरक्षित रखा. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि 17 जुलाई को दिया अंतरिम आदेश फिलहाल जारी रहेगा.

Published date india.com Updated: October 1, 2024 1:14 PM IST
Bulldozer Action. (Representational)
Bulldozer Action. (Representational)

Bulldozer Action: बुलडोजर एक्शन पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जन सुरक्षा सर्वोपरि है. सड़क या रेलवे ट्रैक पर अतिक्रमण करने वाले किसी भी धार्मिक ढांचे, चाहे वह मंदिर हो या दरगाह हटाया जाना चाहिए. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बिना न्यायिक मंजूरी के देशभर में तोड़फोड़ पर रोक लगाने वाले अपने अंतरिम आदेश को आगे बढ़ा दिया और फैसला सुरक्षित रख लिया.

कोर्ट ने क्या कहा?

बुलडोजर एक्शन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और बुलडोजर कार्रवाई और अतिक्रमण विरोधी अभियान पर उसके निर्देश किसी भी धर्म से इतर होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि 17 जुलाई को दिया अंतरिम आदेश जारी रहेगा. यानि देश भर में लोगों की निजी संपति को बुलडोजर कार्रवाई से ढहाए जाने पर रोक जारी रहेंगी. ये रोक SC के अगले आदेश तक जारी रहेगी पर अगर अतिक्रमण सड़क, फुटपाथ, रेलवे लाइन पर है तो उसे हटाये जाने पर कोई रोक नहीं है.

‘किसी खास धर्म के लिए कानून अलग नहीं’

न्यायालय ने कहा कि उसके दिशा-निर्देश पूरे देश में लागू होंगे. साथ ही उसने कहा कि वह यह स्पष्ट कर रहा है कि किसी व्यक्ति का महज आरोपी या दोषी होना संपत्ति के ध्वस्तीकरण का आधार नहीं हो सकता. न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा, ‘हम जो कुछ भी तय कर रहे हैं, हमारा एक धर्मनिरपेक्ष देश है. हम सभी नागरिकों, सभी संस्थानों के लिए इसे जारी कर रहे हैं न कि किसी खास समुदाय के लिए.’ पीठ ने कहा कि किसी खास धर्म के लिए अलग कानून नहीं हो सकता है. उसने कहा कि वह सार्वजनिक सड़कों, सरकारी जमीनों या जंगलों में किसी भी अनधिकृत निर्माण को संरक्षण नहीं देगा.

न्यायालय ने कहा, ‘हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि हमारे आदेश से किसी भी सार्वजनिक स्थान पर अतिक्रमण करने वालों को मदद न मिले.’ सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें आरोप लगाया गया है कि कई राज्यों में आरोपियों की संपत्ति समेत अन्य संपत्तियां ध्वस्त की जा रही हैं.

(इनपुट: एजेंसी से भी) 

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