नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने विश्व धरोहर ताजमहल के बदलते रंग पर चिंता व्यक्त करते हुए मंगलवार को कहा कि सफेद रंग का यह स्मारक पहले पीला हो रहा था, लेकिन अब यह भूरा और हरा होने लगा है. जस्टिस मदन बी लोकूर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने केंद्र को सुझाव दिया कि भारतीय और विदशी विशेषज्ञों की मदद लेकर पहले इसके नुकसान का आकलन किया जाए और फिर इस ऐतिहासिक स्मारक का मूल रूप बहाल करने के लिए कदम उठाए जाएं. Also Read - Taj Mahal Re-Opens: पर्यटकों के लिए छह महीने बाद खुला Taj Mahal, जानें का कर रहे हैं प्लान तो पहले पढ़ लें ये जरूरी बदलाव..

शीर्ष कोर्ट की बेंच ने कहा, ”हमें नहीं पता कि आपके पास इसकी विशेषज्ञता है या शायद नहीं है. यदि आपके पास विशेषज्ञता हो तो भी आप इसका उपयोग नहीं कर रहे हैं. या शायद आप परवाह नहीं करते.” पीठ ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यदि ऐसा कोई निर्णय नहीं हो कि ताज को जाना ही होगा तो शायद हमें भारत के बाहर के किसी विशेष दक्षता प्राप्त संगठन की आवश्यकता होगी. आप भारत और विदेशों के विशेषज्ञों की मदद ले सकते हैं.” Also Read - पर्यटकों के लिए खुशखबरी: इस तारीख से करें ताजमहल का दीदार, जाएं तो ये नियम जान लें

इससे पहले, न्यायालय ने पर्यावरणविद अधिवक्ता महेश चन्द्र मेहता द्वारा पेश तस्वीरों का अवलोकन किया और अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी से सवाल किया कि ताज महल का रंग क्यों बदल रहा है. पीठ ने कहा, पहले यह पीला था और अब यह भूरा और हरा हो रहा है. Also Read - Taj Mahal: ऐसा क्या हुआ कि ताजमहल का बदला-बदला सा है नजारा, देखें Photos

नाडकर्णी ने पीठ से कहा कि ताजमहल का प्रबंधन पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को करना होता है. शीर्ष अदालत ने इस ममले में अब 9 मई को सुनवाई करने का निश्चय किया है. पर्यावरणविद मेहता ने मथुरा तेल शोधक संयंत्र से निकलने वाले धुयें से हो ने वाले वायु प्रदूषण से ताजमहल को हो रहे नुकसान और इसके संरक्षण के लिए जनहित याचिका दायर कर रखी है. शीर्ष अदालत लगातार ताजमहल और इसके आसपास के इलाकों की गतिविधियों की निगरानी कर रही है. (इनपुट- एजेंसी)