नई दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने एक कानून में संशोधन को पारित करने को लेकर हरियाणा सरकार को आड़े हाथ लिया. यह संशोधन अरावली पर्वत पर निर्माण की अनुमति देता है. शीर्ष अदालत ने कहा कि यह कदम वनों को नष्ट कर देगा और इसे अनुमति नहीं दी जा सकती. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने राज्य सरकार से इस कानून के संबंध में आगे और कोई कदम नहीं उठाने को कहा. पीठ ने इस बात पर ‘‘हैरानी’’ जताई कि शीर्ष अदालत द्वारा मना करने के बावजूद हरियाणा सरकार ने यह कदम उठाया.

हरियाणा विधानसभा ने 27 फरवरी को इस कानून में संशोधन को पारित किया जिससे अब हजारों एकड़ जमीन रियल एस्टेट और अन्य गैर-वन क्रियाकलापों के लिए उपलब्ध होगी. पहले यह जमीन सौ वर्ष से अधिक समय से इस कानून के तहत संरक्षित थी. मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा था कि पंजाब भूमि संरक्षण (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2019 ‘‘समय की मांग’’ है. उन्होंने कहा कि यह ‘‘बहुत पुराना’’ कानून था और इस दौरान काफी कुछ बदला है. शीर्ष अदालत इस मामले से निपट रही है जिसमें उसने हरियाणा में अरावली पर्वत के वन्य क्षेत्र में अवैध निर्माण को ढहाने का निर्देश दिया था.

पीठ ने हरियाणा की ओर से पेश अधिवक्ता से कहा, ‘‘आप सर्वोच्च नहीं हैं, सर्वोच्च कानून का शासन है.’’ पीठ ने राज्य सरकार से अरावली क्षेत्र में निर्माण को अनुमति देने वाले कानून पर कोई कदम नहीं उठाने को कहा. अदालत ने कहा, ‘‘यह सच में हैरान करने वाला है. आप वनों को बर्बाद कर रहे हैं… इसकी अनुमति नहीं है. यह स्पष्ट रूप से अवमानना है.’’