नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने लोगों के बीच कोविड-19 महामारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये ‘‘सामाजिक दूरी’’ शब्द का उपयोग नहीं करने का अधिकारियों को निर्देश देने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी और इसे दायर करने को लेकर याचिकाकर्ता पर 10,000 रुपये का अदालत खर्च भी लगाया. Also Read - रेलवे बोर्ड ने कहा- प्लेटफॉर्म पर दुकानें खोली जाएं, वेंडर्स बोले- अभी कोई औचित्य नहीं, दबाव न बनाएं

दरअसल, याचिका में यह कहा गया था कि ‘‘सोशल डिस्टेन्सिंग’’ (सामाजिक दूरी) शब्द के बजाय ‘‘फिजिकल डिस्टेन्सिंग’’ (शारीरिक दूरी) शब्द का उपयोग किया जाना चाहिए. न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये हुई शीर्ष न्यायालय की कार्यवाही में जनहित याचिका को सुनवाई के लिये स्वीकार करने से इनकार दिया. Also Read - दिल्ली से पटना फ्लाइट से गए मजदूर, एयरपोर्ट पर बोले- चप्पल पहनी हैं, हमें विमान में घुसने देंगे?

शकील कुरैशी द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया था कि ‘‘सोशल डिस्टेन्सिंग’’ शब्द से भेदभाव और असमान व्यवहार का भाव आता है तथा इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए. पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘आज से आठ हफ्तों के अंदर उच्चतम न्यायालय मध्यथता केन्द्र में अदालत खर्च के रूप में 10,000 रुपये जमा करने के (निर्देश के) साथ यह रिट याचिका खारिज की जाती है. यदि कोई लंबित याचिका (इस विषय से जुड़ा) है तो उसका निस्तारण हो गया, समझा जाए.’’ Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने कहा- श्रमिकों से बस-ट्रेन का किराया न लें, सरकारों ने मजदूरों के लिए जो किया उसका नहीं हुआ फायदा