नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने लोगों के बीच कोविड-19 महामारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिये ‘‘सामाजिक दूरी’’ शब्द का उपयोग नहीं करने का अधिकारियों को निर्देश देने की मांग करने वाली एक जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी और इसे दायर करने को लेकर याचिकाकर्ता पर 10,000 रुपये का अदालत खर्च भी लगाया.Also Read - मिजोरम के CM की बहन की कोरोना से मौत, राज्य में संक्रमण दर 32 प्रतिशत

दरअसल, याचिका में यह कहा गया था कि ‘‘सोशल डिस्टेन्सिंग’’ (सामाजिक दूरी) शब्द के बजाय ‘‘फिजिकल डिस्टेन्सिंग’’ (शारीरिक दूरी) शब्द का उपयोग किया जाना चाहिए. न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिये हुई शीर्ष न्यायालय की कार्यवाही में जनहित याचिका को सुनवाई के लिये स्वीकार करने से इनकार दिया. Also Read - पहली के बाद दूसरी खुराक लेने के लिए कितने दिनों का हो गैप, इस पर सुनवाई करेगी हाईकोर्ट

शकील कुरैशी द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया था कि ‘‘सोशल डिस्टेन्सिंग’’ शब्द से भेदभाव और असमान व्यवहार का भाव आता है तथा इसका उपयोग नहीं किया जाना चाहिए. पीठ ने आदेश में कहा, ‘‘आज से आठ हफ्तों के अंदर उच्चतम न्यायालय मध्यथता केन्द्र में अदालत खर्च के रूप में 10,000 रुपये जमा करने के (निर्देश के) साथ यह रिट याचिका खारिज की जाती है. यदि कोई लंबित याचिका (इस विषय से जुड़ा) है तो उसका निस्तारण हो गया, समझा जाए.’’ Also Read - केरल: एक दिन में कोरोना वायरस के 15,951 नए मामले, 165 और मरीजों की मौत