नई दिल्ली, 19 मार्च | सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को वकील-कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और उनके पति जावेद आनंद की अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ा दी। न्यायालय ने निजी छूट और हिरासत में लेकर पूछताछ के सवालों को बड़ी पीठ को हस्तांतरित कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले को बड़ी पीठ को हस्तांतरित कर दिया, जिसमें यह जानने की कोशिश की जाएगी की कि कहीं जांच में सहयोग न करने के कारण गुजरात पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की मांग तो नहीं कर रही।  यह भी पढ़ें–सर्वोच्च न्यायालय ने सीतलवाड की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

इस जोड़े पर अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में एक संग्रहालय की स्थापना के लिए उनके गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) सबरंग ट्रस्ट द्वारा इकट्ठा किए गए 1.5 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है। गुलबर्ग सोसायटी में वर्ष 2002 के सांप्रदायिक दंगे के दौरान 69 लोगों को मार दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने 19 फरवरी को तीस्ता और उनके पति की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। यह भी पढ़ें– सीतलवाड की गिरफ्तारी पर रोक की अवधि बढ़ी

न्यायालय में न्यायमूर्ति मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बड़ी पीठ निजी छूट, कानून के शासन, जांच में गैर-सहयोगात्मक रवैये से संबंधित मुद्दों को लेकर अंतरिम जमानत पर फैसला लेगी।