नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न आवासीय परियोजनाओं में मकान के खरीदारों के साथ धोखाधड़ी और पैसा हड़पने की एक शिकायत पर दिल्ली पुलिस को गुरुवार को आम्रपाली समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा और दो निदेशकों को गिरफ्तारी करने की अनुमति प्रदान कर दी. शीर्ष अदालत में आम्रपाली समूह की परियोजनाओं के करीब 42,000 खरीदारों को मकानों का कब्जा दिलाने के लिए दायर याचिकाएं विचाराधीन हैं. कोर्ट ने समूह के सीएमडी अनिल शर्मा और दो निदेशकों शिव प्रिय और अजय कुमार को गिरफ्तार करने की अनुमति देने के अलावा इन सभी की निजी संपत्तियां जब्त करने का भी आदेश दिया है. ये तीनों इस समय न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं करने की वजह से पिछले 9 अक्ट्रबर से उप्र पुलिस की हिरासत में नोएडा के एक होटल में हैं.

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने जब दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को इन तीनों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया तो वे हैरान रह गए. आर्थिक अपराध शाखा ने अपने आवेदन में कहा था कि उसे एक अलग मामले में तीनों से पूछताछ करनी है. इस पर पीठ ने कहा, ‘‘हमने कभी भी किसी एजेन्सी को निदेशकों को गिरफ्तार करने और उनसे पूछताछ करने से नहीं रोका है. वे (आर्थिक अपराध शाखा) किसी भी या सभी निदेशकों को गिरफ्तार करने के लिए स्वतंत्र हैं.

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मकान के खरीदारों के धन का अन्यत्र इस्तेमाल किए जाने पर कड़ी आपत्ति करने वाली पीठ ने कोर्ट द्वारा नियुक्त फारेंसिक ऑडिटरों को आम्रपाली समूह समूह द्वारा मकान खरीदारों का धन अन्यत्र लगाने के मामले में अपनी विस्तृत जांच 22 मार्च से पहले पूरी करने का निर्देश दिया. न्यायालय इस मामले में अब 24 मार्च को आगे विचार करेगा. पीठ ने पहले ही आम्रपाली समूह और इसके निदेशकों को मकान खरीदारों की अन्यत्र ले जाई गई रकम जमा कराने या फिर इसका नतीजा भुगतने के लिए तैयार रहने के लिए कहा था. पीठ ने समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शर्मा का दक्षिण दिल्ली में स्थित बंगले सहित उनकी और दो निदेशकों की निजी संपत्तियां तत्काल जब्त करने का आदेश दिया.

इससे पहले, पीठ ने फारेंसिक ऑडिटर्स से जांच की स्थिति के बारे में पूछा और जानना चाहा कि वे अपनी रिपोर्ट कब तक दाखिल करेंगे. ऑडिटरों ने कहा कि आम्रपाली समूह और उसके निदेशकों ने जिन फर्मों के माध्यम से धन इधर से उधर किया था वे और उनके संबंधित अधिकारी बच रहे हैं और ऑडिट के काम में सहयोग नहीं कर रहे हैं. इस पर पीठ उन कंपनियों और व्यक्तियों के नामों की सूची मांगी जो जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं. पीठ को जब यह बताया गया कि करीब 200 लोग या कंपनियां हैं जो टाल मटोल कर रहे हैं तो कोर्ट ने उन्हें तीन समूहों में रखते हुए पांच, छह, सात और आठ मार्च को फारेंसिक ऑडिटरों के सामने पेश होने का निर्देश दिया. पीठ ने कहा कि यदि किसी ने भी इसका उल्लंघन किया तो न्यायालय उसके साथ सख्ती से पेश आएगा.