नई दिल्ली: 2008 के मालेगांव ब्लास्ट के आरोपी लेफ्टनेंट कर्नल पुरोहित को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. कर्नल पुरोहित 9 साल से जेल में बंद थे. उनपर धमाके की साजिश रचने का आरोप था. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 अगस्त को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.  इस दौरान कर्नल पुरोहित के वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट से कहा कि न्याय के हित में पुरोहित को जमानत मिलनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बांबे हाईकोर्ट से मिली जमानत रद्द करवाने की अर्जी पर भी सुनवाई 10 अक्टूबर तक के लिए टाल दी है. पिछले 14 अगस्त को एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करते हुए पुरोहित की जमानत अर्जी का विरोध किया था. एनआईए ने कहा था कि साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का मामला पुरोहित से अलग है. पुरोहित के खिलाफ कई सबूत इकट्ठा किए गए हैं.

गौरतलब है कि इसी साल 25 अप्रैल को 2008 के मालेगांव धमाका केस में बॉम्बे हाईकोर्ट से साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जमानत मिल गई थी. हाईकोर्ट ने प्रज्ञा पर लगाई गई मकोका धारा को भी हटा दिया था, जिसके बाद मकोका के तहत जुटाए गए सबूत भी केस से निकाल दिए गए. हालांकि इस मामले में कोर्ट ने कर्नल पुरोहित को जमानत देने से इंकार कर दिया था.

हाईकोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को 5 लाख रुपये की जमानत राशि और अपना पासपोर्ट NIA को जमा कराने और साथ ही ट्रायल कोर्ट में हर तारीख पर पेश होने के आदेश दिए थे. पीठ ने उसे सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने और जब भी जरूरत हो एनआईए अदालत में रिपोर्ट करने का भी निर्देश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि पहली नजर में साध्वी के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है.

29 सितंबर, 2008 को हुआ था मालेगांव विस्फोट

बता दें कि मालेगांव विस्फोट 29 सितंबर, 2008 को हुआ, जिसमें छह लोग मारे गए और कई लोग घायल हो गए। शुक्रवार की नमाज के बाद एक मस्जिद में एक मोटरसाइकिल पर बम विस्फोट हुआ था। पुरोहित की गिरफ्तारी के तुरंत बाद सेना ने एक कोर्ट ऑफ इंक्वायरी का आदेश दिया जिससे बाद में पुरोहित को सेवा से बर्खास्त करने की सिफारिश की गई। हालांकि, कुछ महीनों बाद पुरोहित ने आरोप लगाया कि सैन्य खुफिया अधिकारियों ने उन्हें प्रताड़ित किया.