नई दिल्ली: कर्नाटक के ‘नाटक’ पर देश की शीर्ष अदालत में शुक्रवार सुबह 10: 30 बजे से सुनवाई शुरू हो गई. तीन जजों की बेंच बीएस येदियुरप्पा के कर्नाटक के सीएम के तौर पर शपथ लेने के मामले में कांग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) की याचिका पर सुनाई करेगी और कोई बड़ा फैसला इस पर सुना सकती है. बेंच कर्नाटक गवर्नर वजुभाई वाला के बीजेपी को नेता येदियुरप्पा को सीएम की शपथ के लिए आमंत्रित करने के फैसले पर सुनवाई करेगी और येदियुरप्पा के समर्थन के दावे वाले पत्रों पर भी विचार करेगी. ये पत्र बीजेपी के वकील मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किए हैं. Also Read - भाजपा शासित राज्यों ने कोविड-19 के की लड़ाई में आत्मसमर्पण कर दिया है : कांग्रेस

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कर्नाटक के गवर्नर के बीजेपी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस-जेडीएस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बीएस येदियुरप्पा के पत्र को सौंपने के लिए कहा. इस पर वकील मुकुल रोहतगी ने बीजेपी नेता बीएस येदियुरप्पा के लिखे दो पत्र सुप्रीम कोर्ट को सौंपे. Also Read - मोदी सरकार 2.0 की पहली वर्षगांठ, 6 साल पूरे होने पर भाजपा करेगी 'आभासी रैलियों' का आगाज, गिनाएगी उपलब्धियां

बीजेपी के वकील रोहतगी ने कहा कि येदियुरप्पा सबसे बड़ी पार्टी के नेता के तौर पर चुने गए हैं, बीजेपी और उनके पास जरूरी एमएलए की संख्या का समर्थन हासिल है और फ्लोर पर बहुमत साबित करने के लिए तैयार है.

विवादों में आए येदियुरप्पा के शपथ ग्रहण पर आज की सुनवाई सियासी जगत में बेहद अहम है. कोर्ट पहले ही बीजेपी के समर्थन वाले विधायकों की हस्ताक्षर वाली सूची मांग चुकी है, वहीं, बीजेपी ने कांग्रेस- जेडीएस के समर्थन वाली विधायकों की सूची में फर्जी हस्ताक्षर का आरोप लगाया है. तीन जजों की बेंच में शामिल जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एसके बोबड़े और जस्टिस अशोक कोई बड़ा निर्देश या फैसला दे सकते हैं. बता दें कि राज्यपाल ने येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया है. इधर विधायकों में फूट की आशंका के बीच कांग्रेस-जेडीएस अपने विधायकों को राज्य से बाहर आंध्र प्रदेश लेे गई है.

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष येदियुरप्पा का पत्र पेश किया जाएगा

येदियुरप्पा ने बीती 15 मई और 16 मई को राज्य में सरकार के गठन के लिए अपने दावे और कांग्रेस-जेडीएस के दावे को खारिज करने के लिए गवर्नर वजूभाई वाला को दो पत्र लिखे थे. बीजेपी नेता ने इन पत्रों में अपने बहुमत का समर्थन करने का दावा किया है. उच्चतम न्यायालय कर्नाटक के इसी सियासी मामले पर फिर सुनवाई करने जा रहा है.

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अहम बातें

– सुप्रीम कोर्ट की बेंच बीजेपी के दावे वाले समर्थन पत्र पर विचार करेगी और इसके आधार पर कोई निर्णय दे सकती है.

– बीजेपी के सीएम येदियुरप्पा को 15 दिन में बहुमत साबित करने के लिए समय दिया गया है, कोर्ट इस समय सीमा में कमी कर सकती है.

– बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस और जेडीएस ने जो विधायकों के समर्थन का पत्र  राज्यपाल को दिया है, उसमें कई विधायकों के हस्ताक्षर फर्जी हैं.

– पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता एचडी देवेगौड़ा ने गुरुवार रात को आंध्र प्रदेश स्थित तिरुपति मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे.

येदियुरप्पा के पास बहुमत का आंकड़ा कैसे

येदियुरप्पा ने गुरुवार (17 मई) सुबह नौ बजे सीएम पद की शपथ ली थी. येदियुरप्पा ने राज्यपाल को सौंपे गए पत्र में बहुमत होने का दावा किया है, लेकिन ये अभी तक सामने नहीं आ सका कि उनके पास समर्थन के लिए पर्याप्त संख्या कहां से आ गई. कांग्रेस और जेडीएस ने राज्यपाल वजुभाई वाला द्वारा येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने को चुनौती दी है. आपको बता दें कि कर्नाटक में 222 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78 और जेडीएस को 38 सीटें मिली हैं. दो निर्दलीय  जीते हैैं.

17 मई को करीब साढ़े तीन घंटे चली थी सुनवाई

जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने याचिका पर 17 मई को देर रात दो बजकर 11 मिनट से सुनवाई शुरू की.  यह सुनवाई करीब साढ़े तीन घंटे चली. पीठ ने यह भी साफ किया कि शपथग्रहण और सरकार गठन उसके समक्ष मामले की सुनवाई के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा. यह आदेश बेंगलुरु में शपथ ग्रहण से कुछ घंटे पहले ही आया, जहां 75 वर्षीय येदियुरप्पा दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले थे.

(इनपुट- एजेंसी