नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने चुनाव प्रचार के दौरान प्लास्टिक सामग्री के उपयोग के खिलाफ याचिका पर बृहस्पतिवार को केन्द्र और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा. चुनाव प्रचार के दौरान बैनर और होर्डिंग आदि में विशेष रूप से प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है. न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने अधिवक्ता डब्ल्यू एडविन विल्सन की याचिका पर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किये. इन्हें चार सप्ताह के भीतर नोटिस के जवाब देने हैं.

 

विल्सन ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण के एक आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है. अधिकरण ने निर्वाचन आयोग और राज्यों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया था कि प्लास्टिक के इस्तेमाल के खिलाफ सरकार के परामर्श के अनुपालन की निगरानी करे. अधिवक्ता संजय उपाध्याय और सालिक शफीक के माध्यम से दायर इस याचिका में विल्सन ने कहा है कि अधिकरण ने चुनाव के दौरान पीवीसी बैनरों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध के मुख्य मुद्दे के बारे में प्रभावी आदेश नहीं दिया जबकि ये एक बड़ी समस्या है.

चुनावों के दौरान प्लास्टिक से तैयार की जाती है प्रचार सामग्री
याचिका में दावा किया गया है कि चुनावों के दौरान प्लास्टिक से प्रचार सामग्री तैयार की जाती है और इसके बाद इसे बेकार मानकर फेंक दिया जाता है जो पर्यावरण के लिये बहुत ही हानिकारक है. याचिका में चुनाव प्रचार के दौरान विज्ञापन और प्रचार के लिये बैनर और होर्डिंग में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक सहित पीवीसी, सिन्थेटिक प्लास्टिक पालीमर और क्लोरिनेटेड प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है.

चुनाव प्रचार के दौरान दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल करने का परामर्श
हरित अधिकरण को पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने सूचित किया था कि सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और मुख्य चुनाव अधिकारियों को चुनाव प्रचार के दौरान दूसरे विकल्पों का इस्तेमाल करने का परामर्श दिया गया है. मंत्रालय ने कहा था कि इस संबंध में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को भेजे गये पत्रों में सलाह दी गयी है कि चुनाव प्रचार में कागज, कपड़ा और कंपोस्ट के योग्य प्लास्टिक जैसी पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का उपयोग किया जाये. हरित अधिकरण ने मंत्रालय द्वारा दी गयी इस जानकारी के बाद ही प्लास्टिक के इस्तेमाल के खिलाफ सरकार के परामर्श का अनुपालन करने के बारे में आदेश दिया था.