नई दिल्ली. केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने कहा कि महिलाओं को पुरुषों के बराबर बूजा करने का अधिकार है. इस पर कानून पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. Also Read - सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के विरोध में केरल में प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इंकार

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने इस मुद्दे के मध्यस्थ की बातों को ऑब्जर्व करते हुए कहा, एक महिला होने के नाते आपके पास प्रार्थना करने का हक है. उन्होंने आगे कहा, किस आधार पर आपको मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाता है. यह संवैधानिक जनादेश के खिलाफ है. जब आप इसे पब्लिक के लिए खोल देते हैं तो कोई भी वहां जा सकता है. Also Read - ब्रेट कावानाह पर आरोप लगाने वाली महिला का ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर बनाया मजाक

मंगलवार से सुनवाई शुरू
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने केरल के ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी से संबंधित मामले में मंगलवार सुनवाई शुरू कर दी थी. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने याचिकाकर्ताओं इंडियन लायर्स एसोसिएशन और अन्य के वकील से कहा कि वे तीन न्यायाधीश की पीठ द्वारा पिछले साल उसके पास भेजे गए सवालों तक ही अपनी दलीलें सीमित रखें. संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा शामिल हैं. Also Read - वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनेंगी इंदू मल्होत्रा, के एम जोसेफ का प्रमोशन रुका

अवधि के भीतर बहस पूरी करें
संविधान पीठ याचिकाकर्ताओं के लिए समय सीमा निर्धारित करते हुए उनसे कहा कि वे इस अवधि के भीतर ही अपनी बहस पूरी करने का प्रयास करें. याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील आर पी गुप्ता ने बहस शुरू की और मंदिर के इतिहास का जिक्र किया. पीठ ने कहा, ‘‘आपको अनावश्यक बातों में जाने की जरूरत नहीं है और वकील को संविधान पीठ के पास भेजे गये मुद्दों तक सीमित रखना चाहिए.’’ इन याचिकाओं पर बुधवार से बहस होगी.

5 सवाल भेजे थे
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 13 अक्तूबर को पांच प्रश्न तैयार करके संविधान पीठ के पास भेजे थे. इनमें यह सवाल भी था कि क्या मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध पक्षपात करने के समान है और इससे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 में प्रदत्त उनके मौलिक अधिकारों का हनन होता है और उन्हें अनुच्छेद 25 और 26 में प्रयुक्त ‘‘नैतिकता’’ से संरक्षण नहीं प्राप्त है. पत्थनमथिट्टा जिले के पश्चिमी घाट की पहाड़ी पर स्थित सबरीमाला मंदिर के प्रबंधन ने शीर्ष अदालत से पहले कहा था कि रजस्वला अवस्था की वजह से वे ‘‘शुद्धता’’ बनाये नहीं रख सकती है. इसलिए 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश मंदिर में वर्जित है.

केरल सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था
इस मामले में सात नवंबर , 2016 को केरल सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था कि वह ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में है. शुरूआत में राज्य की एलडीएफ सरकार ने 2007 में प्रगतिशील रूख अपनाते हुये मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की हिमायत की थी जिसे कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार ने बदल दिया था. यूडीएफ सरकार का कहना था कि वह 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित करने के पक्ष में है क्योंकि यह परपंरा अति प्राचीन काल से चली आ रही है.