नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की युवा नेता प्रियंका शर्मा की रिहाई में देरी के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की सरकार को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया. भाजपा कार्यकर्ता पर आरोप था कि उन्होंने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक मीम सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. नोटिस पर शीर्ष न्यायालय ने राज्य सरकार को चार हफ्तों के भीतर जवाब देने को कहा है.

ममता की मॉर्फ्ड फोटो केस: प्रियंका शर्मा की गिरफ्तारी पहली नजर में मनमानी कार्रवाई: SC

भाजपा युवा मोर्चा की नेता शर्मा को एक स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेता की शिकायत पर 10 मई को गिरफ्तार किया गया था. भारतीय दंड संहिता की धारा 500 के तहत और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत शर्मा पर मानहानि का आरोप लगाया गया था. शीर्ष अदालत ने ‘पहली नजर में’ उनकी गिरफ्तारी को मनमाना करार दिया और शर्मा की तत्काल रिहाई के आदेश दिए. हालांकि, उनके भाई राजीव शर्मा द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर एक याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रियंका शर्मा को रिहा करने में जानबूझकर देरी की गई और उन्हें एक दिन अतिरिक्त जेल में रखा गया.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमानत के आदेश के बावजूद शर्मा को सलाखों के पीछे रखने में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा देरी को अपवाद माना. राज्य सरकार ने कहा कि उसकी रिहाई में शीर्ष अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने में देरी के कारण समय लगा, जो राज्य के जेल मैनुअल नियमों के अनुसार अनिवार्य है. शीर्ष अदालत ने कहा, “ऐसा नहीं किया जाना चाहिए. पहली बात प्रियंका की गिरफ्तारी मनमाने रूप से हुई थी.. और जेल मैनुअल के नियम सर्वोच्च न्यायालय से ऊपर नहीं हैं.”