नई दिल्ली: पूरे देश में पटाखों पर पूरी तरह पाबंदी लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया. हालांकि कोर्ट ने ग्रीन पटाखे बेचने की इजाजत दी है, जो कम प्रदूषण फैलाते हैं. कोर्ट ने ई-कॉमर्स पोर्टल्स को पटाखे बेचने से रोक दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों को केवल लाइसेंस पाए ट्रेडर्स ही बेच सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि दिपावली पर रात 8 से 10 बजे तक की पटाखे फोड़ सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में पटाखों के निर्माण, बिक्री और अपने पास रखने के संबंध में प्रतिबंध लगाने वाली याचिकाओं पर फैसला सुनाया. कोर्ट ने कहा कि पटाखों में हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल नहीं होगा.

शीर्ष अदालत ने 28 अगस्त को वायु प्रदूषण के चलते बिगड़ते हालात को नियंत्रित करने के मद्देनजर पूरे देश में पटाखों पर प्रतिबंध लगाने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. अदालत ने याचिकाकर्ताओं, पटाखा निर्माताओं और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) का पक्ष सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि स्वास्थ्य का अधिकार और व्यापार या व्यवसाय चलाने के अधिकार के बीच सामंजस्य बनाने की जरूरत है. पटाखा निर्माण करने वालों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि दिवाली के दौरान केवल पटाखे प्रदूषण बढ़ाने की एकमात्र वजह नहीं है. यह प्रदूषण बढ़ाना वाला एक कारक है और इस आधार पर पूरे उद्योग को बंद नहीं किया जा सकता. अदालत ने सुनवाई के दौरान वायु प्रदूषण की वजह से बच्चों में सांस की समस्याओं के बढ़ने को लेकर भी चिंता जताई थी और कहा था कि वह इस पर निर्णय करेगी कि क्या पटाखे फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा या मुनासिब नियंत्रण स्थापित किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि प्रतिबंध से जुड़ी याचिका पर विचार करते समय पटाखा उत्पादकों के आजीविका के मौलिक अधिकार और देश के 1.3 अरब लोगों के स्वास्थ्य अधिकार समेत विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखना होगा. कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन के अधिकार) सभी वर्ग के लोगों पर लागू होता है और पटाखों पर देशव्यापी प्रतिबंध पर विचार करते समय संतुलन बरकरार रखने की जरूरत है. कोर्ट ने केंद्र से प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिये उपाय सुझाने और यह बताने को कहा था कि पटाखे पर प्रतिबंध लगाने से व्यापक रूप से जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा.शीर्ष अदालत ने 2017 में दिवाली के दौरान दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था.