Supreme Court On Oxygen Crisis: देश की राजधानी दिल्ली में जारी ऑक्सीजन के संकट का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे मामले के बाद बुधवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और आज ही इस मामले पर सुनवाई की अपील दाखिल की जिसपर सुनवाई हुई. केंद्र सरकार ने कोर्ट में बताया कि दिल्ली की मांग अधिक है, उसके मुताबिक संसाधन की जरूरत है. अदालत में जस्टिस शाह ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ये एक राष्ट्रीय आपदा है, ऑक्सीजन की कमी की वजह से लोगों की मौत हुई है. केंद्र सरकार अपनी ओर से कोशिश कर रही है. लेकिन अभी किल्लत है ऐसे में अपना प्लान हमें बताइए. Also Read - नारद मामले में ममता बनर्जी, घटक की याचिकाओं पर सुनवाई से अलग हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दिल्ली हाई कोर्ट ने अवमानना की प्रक्रिया शुरू की है जबकि केंद्र व तमाम अधिकारी इस मामले में बेहतर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच मामला देखेगी. Also Read - गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा बयान, 'जुलाई-अगस्त में कोविड-19 टीकाकरण की गति बढ़ाएगी केन्द्र सरकार'

दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली समेत सभी राज्यों को किए जाने वाले ऑक्सीजन सप्लाई की निगरानी कर रहे अधिकारियों से आज सुनवाई के दौरान मौजूद रहने को कहा.सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि आपने दिल्ली को कितना ऑक्सीजन दिया है, साथ ही केंद्र ने हाईकोर्ट में ये कैसे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली को 700 एमटी ऑक्सीजन सप्लाई का आदेश नहीं दिया. केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि अप्रैल से पहले ऑक्सीजन की डिमांड ज्यादा नहीं थी. Also Read - केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, 'कोरोना से मौत पर परिवार को मुआवजा नहीं दे सकते, वित्तीय बूते के बाहर है'

सुप्रीम कोर्ट ने सीधे कहा कि केंद्र की जिम्मेदारी है कि आदेश का पालन करे, नाकाम अफसरों को जेल में डालें या फिर अवमानना के लिए तैयार रहें. लेकिन इससे दिल्ली को ऑक्सीजन नहीं मिलेगी, वो काम करने से ही मिलेगी.कोर्ट ने शाम तक दिल्ली में ऑक्सीजन सप्लाई को बढ़ाने के लिए ब्यौरा देने को कहा. कोर्ट ने कहा, ‘हमें शाम तक बताइए कि दिल्ली में सप्लाई कैसे बढ़ेगी.’

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते दिन ऑक्सीजन संकट के मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था, साथ ही केंद्र के दो अफसरों को समन भी भेजा था. अब केंद्र सरकार ने इसी पर आपत्ति जाहिर की है.

केंद्र ने इस मामले पर तुरंत सुनवाई की मांग की तो चीफ जस्टिस एनवी. रमना ने कहा कि जजों की कमी है, ऐसे में जस्टिस चएनवी. रमना ने कहा कि जजों की कमी है, ऐसे में जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ही इस मामले को सुनेगी.