शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, युवा कपल्स को दी ये बड़ी चेतावनी, चौंकानेवाला है पूरा मामला

Supreme Court on False Promise of Marriage: शादी के झूठे वादे पर रेप से जुड़े मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मैरिज से पहले लड़का और लड़की एक-दूसरे के लिए अंजान होते हैं. इस मामले में शख्स पर दुबई बुलाकर महिला के साथ संबंध बनाने का आरोप है.

Published date india.com Published: February 17, 2026 1:28 PM IST
Supreme court, rape on false promise of marriage
शादी के झूठे वादे पर रेप मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दी ये सख्त हिदायत

Supreme court on pre-marital relationship: सुप्रीम कोर्ट ने शादी का झांसा देकर रेप के एक मामले में कहा है कि प्री-मैरिटल रिलेशनशिप यानि शादी से पहले संबंध बनाने से पहले युवाओं को बहुत सतर्क रहना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि शादी से पहले दो लोग अजनबी होते हैं, इसलिए बिना सोचे-समझे किसी पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है खासकर शारीरिक संबंध बनाने के मामलों में. आइये जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने क्यों ऐसा कहा…

दो जजों की बेंच की अहम टिप्पणी

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने एक जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी. जमानत याचिका के तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि शादी से पहले एक लड़का और लड़की एक-दूसरे के लिए अजनबी ही होते हैं. कोर्ट ने कहा कि शायद हम पुराने ख्यालात के हो सकते हैं, लेकिन शादी से पहले किसी पर भी भरोसा करने से पहले बहुत सावधान रहना चाहिए. उनके बीच रिश्ता चाहे कितना भी गहरा हो, शादी से पहले सावधानी बरतना जरूरी है.

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इस केस में एक गंभीर मोड़ तब आया जब महिला ने आरोप लगाया कि दुबई में उसकी मर्जी के बिना इंटीमेट वीडियो रिकॉर्ड किए गए. आरोपी ने इन वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसे चुप रहने और संबंध जारी रखने के लिए मजबूर किया.

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हैरानी जताते हुए कहा कि अगर कोई महिला शादी को लेकर इतनी गंभीर है, तो उसे शादी से पहले ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए थे. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि आपसी सहमति से बने संबंधों (Consensual Relationship) के ऐसे मामलों में अक्सर सजा दिलाना मुश्किल होता है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है.

क्या है पूरा मामला?

यह मामला एक ऐसी महिला से जुड़ा है जो आरोपी से 2022 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर मिली थी. महिला ने शख्स पर आरोप लगाया है कि शख्स ने शादी का झांसा देकर दिल्ली और फिर दुबई में महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाए. बाद में पता चला कि वह शख्स पहले से शादीशुदा था और उसने तीसरी शादी भी कर ली थी. सुप्रीम कोर्ट शख्स की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी, क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत देने से इंकार किया था.

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दिल्ली HC का जमानत से इंकार

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. कोर्ट का मानना था कि यदि शादी का वादा शुरू से ही झूठा (Bad Faith) था और आरोपी का इरादा कभी शादी करने का नहीं था, तो ऐसी शारीरिक सहमति कानून की नजर में वैध नहीं मानी जा सकती. दिल्ली हाई कोर्ट ने शख्स की तीसरी शादी को देखते हुए ऐसा कहा. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले को आपसी समझौते (Mediation) के जरिए सुलझाने का सुझाव दिया है.

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