
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
देशभर में तेजी से बढ़ते डिजिटल अरेस्ट के मामलों को गंभीर खतरा मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया है. अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को मामलों की गहराई से जांच करने का आदेश दिया. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सुर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा ये स्कैम देशभर में लोगों को ठगने के नए डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसलिए इन पर तुरंत रोक लगाना बेहद जरूरी है.
कोर्ट ने साफ किया कि CBI पहले उन मामलों की जांच करे जहां सीधे-सीधे डिजिटल अरेस्ट स्कैम की शिकायतें दर्ज हुई हैं. बाकी साइबरक्राइम से जुड़े मामलों की जांच बाद में दूसरी फेज में की जा सकती है. यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डरा-धमकाकर पैसे वसूलने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.
कोर्ट ने CBI को यह भी अनुमति दी है कि वह इन स्कैम के पीछे बैंकर्स की संभावित भूमिका की जांच भी कर सकती है. जहां भी नकली या फर्जी बैंक अकाउंट खुलवा कर लोगों से ठगी की गई है, वहां बैंक अधिकारियों पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी.
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने RBI को भी इस मामले में शामिल किया है और पूछा है कि वह बताएं कि किस तरह के AI और मशीन लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल धोखाधड़ी वाले बैंक अकाउंट पहचानने में किया जाता है. इसका उद्देश्य है कि भविष्य में ऐसे अकाउंट समय रहते पकड़े जा सकें और बड़े साइबर फ्रॉड रुक सकें.
सुप्रीम कोर्ट ने आईटी सर्विस प्रोवाइडर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया है कि वे CBI की जांच में पूरा सहयोग करें और जरूरत पड़ने पर कंटेंट डेटा भी उपलब्ध कराएं. इसके अलावा पंजाब, तमिलनाडु, उत्तराखंड और हरियाणा जैसे राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे CBI को पैन-इंडिया स्तर पर जांच करने की अनुमति दें. कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह भी कहा है कि वे अपनी साइबर क्राइम यूनिट्स को पूरी क्षमता से चलाएं और अगर कहीं कोई दिक्कत है तो उसकी जानकारी तुरंत अदालत को दें.
कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि एक ही नाम पर कई-कई SIM कार्ड जारी किए जा रहे हैं, जिससे स्कैमर्स फायदा उठा रहे हैं. इसलिए बेंच ने टेलीकॉम नेटवर्क में इस दुरुपयोग को रोकने के लिए एक मॉडल प्रोटोकॉल तैयार करने का आदेश दिया है. अदालत द्वारा उठाया गया यह कदम इस दिशा में एक बड़ा संदेश देता है कि डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ अब देश की सबसे बड़ी संस्थाएं मिलकर सख्ती से काम करने वाली हैं.
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