नई दिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को देशभर की जेलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया। साथ ही पुलिस थानों में भी सीसीटीवी लगाने के निर्देश दिए, जो हिरासत में कैदियों की मौत सहित कई अन्य वारदातों के लिए अक्सर विवादों में रहते हैं। यह भी पढ़े:ओमन चांडी पर माकपा कार्यकर्ता ने फेंकी चप्पलAlso Read - SA vs IND: कोरोना के तीसरे वैरिएंट के बीच भारत का साउथ अफ्रीका दौरा, कप्तान ने जताया 'बायो-बबल' कदमों पर भरोसा

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सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस. ठाकुर और न्यायमूर्ति आर. बानुमति की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सभी जेलों में सीसीटीवी कैमरे एक साल के भीतर लगाए जाएं। न्यायालय ने कहा कि हर पुलिस थाने में भी कम से कम दो महिला कांस्टेबल होने चाहिए। न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि सभी राज्य सरकारें राज्य मानवाधिकार आयोग से संबंधित रिक्तियों को तीन माह के भीतर भर लें। Also Read - RSA A vs IND A: भारतीय गेंदबाजों ने कसा शिकंजा, परेशानी में साउथ अफ्रीका

न्यायालय ने केंद्र शासित प्रदेशों को भी राज्य मानवाधिकार के गठन का आदेश दिया। साथ ही यह भी कहा कि दिल्ली सहित सभी केंद्र शासित प्रदेशों के पास अपना मानवाधिकार आयोग नहीं है। न्यायालय ने यह आदेश दिलीप के. बासु की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें जेलों में सुधार और राज्य मानवाधिकार आयोग में रिक्तियों को भरने के लिए आदेश देने का अनुरोध किया गया था।