'मिस्टर ज्यूडिशियल! आपको ऑर्डर देता हूं...' SC में वकील का हाईवोल्टेज ड्रामा, CJI के लिए कहे अपशब्द

यह घटना जस्टिस केवी विश्वनाथन, जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने हुई. हालांकि, इस दौरान CJI कोर्ट रूम में मौजूद नहीं थे.हंगामे के बाद कोर्ट के आदेश पर सिक्योरिटी ने वकील को तुरंत बाहर निकाल दिया.

Written by: Anjali Karmakar
Updated: July 10, 2026, 7:14 PM IST
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पिटीशन दायर करने आया था वकील
  • कोर्ट की अवमानना का केस बनने पर हो सकती है 6 महीने की जेल
  • बार काउंसिल भी ले सकता है एक्शन, वकालत पर लग सकती है रोक
  • वकील के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने अब तक नहीं लिया एक्शन

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार (10 जुलाई) को एक वकील ने हाईवोल्टेज ड्रामा किया. लीगल न्यूज की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, जिस वकील ने हंगामा किया उसका नाम प्रबल प्रताप था. वह इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपनी रिट याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था. याचिका में अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें प्रबल की अर्जी पर पुलिस से जांच कराने के बजाय उसे निजी शिकायत मान लिया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, बेंच के सवालों पर वकील अपना आपा खो बैठा. उसने CJI के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया. फाइलें और पेपर्स भी फेंके.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना जस्टिस केवी विश्वनाथन, जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने हुई. हालांकि, इस दौरान CJI कोर्ट रूम में मौजूद नहीं थे.हंगामे के बाद कोर्ट के आदेश पर सिक्योरिटी ने वकील को तुरंत बाहर निकाल दिया. फिलहाल दिल्ली पुलिस वकील को पूछताछ के लिए ले गई है.

क्या है मामला?

यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा था. याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप खुद अदालत में अपनी पैरवी कर रहे थे. सुनवाई के दौरान उन्होंने जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच को संबोधित करते हुए कहा कि वे ‘ज्यूडिशियल सर्वेंट’ हैं. उन्हें लखनऊ के विकास नगर के ACP के खिलाफ FIR दर्ज कराने का आदेश देना चाहिए.

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो जज ने याचिकाकर्ता से पूछा आप खुद ही पैरवी करेंगे. इस पर प्रबल प्रताप ने कहा, “मिस्टर ज्यूडिशियल, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के ACP के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दें.”

इस पर जस्टिस केवी विश्वनाथन ने हैरानी जताते हुए पूछा- “आप मुझे आदेश दे रहे हैं?” जवाब में याचिकाकर्ता बोला- “मेरी तरफ से बस इतना ही. सब कुछ रिकॉर्ड पर है.” इसके बाद उसने केस की फाइल हवा में फेंक दी. फिर CJI के बारे में अपशब्द कहे.कोर्ट अधिकारियों की ओर से बाहर ले जाए जाने के दौरान भी वकील ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और कहा, “ये दे देना CJI को.” इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने अब तक नहीं लिया एक्शन

याचिकाकर्ता के व्यवहार के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने संयम दिखाया. अपने आदेश में बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता की स्थिति को देखते हुए उसके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि मामले के रिकॉर्ड और तथ्यों की जांच के बाद उसे दखल का कोई आधार नहीं मिला. इसके साथ ही विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया गया.पेंडिंग सभी एप्लिकेशन कैंसिल कर दिए गए.

कितनी हो सकती है सजा?

इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील अनुपम मुखर्जी ने इस बारे में अपनी राय दी. उनके मुताबिक, ये कोर्ट की अवमानना यानी Contempt of Court का केस बनता है. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट संविधान के आर्टिकल 129 और 215 के तहत ऐसे मामलों में कोर्ट को कार्यवाही करने का अधिकार है. वकील को कोर्ट की अवमानना के मामले में 6 महीने की जेल हो सकती है. जुर्माना भी लगाया जा सकता है. हालांकि, अगर कोर्ट को बिना शर्त माफी संतोषजनक लगे, तो सजा में राहत मिल सकती है.

बार काउंसिल भी ले सकता है एक्शन

अगर कोई वकील अपने पेशे के नियमों का पालन नहीं करता या गलत आचरण करता है, तो उसके खिलाफ बार काउंसिल एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत कार्रवाई कर सकता है. पहले इस मामले की जांच होगी. वकील दोषी मिला, तो उसे चेतावनी दी जा सकती है. संभव है कि उसे कुछ वक्त के लिए वकालत करने से रोका जाए या वकील का नाम बार काउंसिल की लिस्ट से हटा दिया जाए.

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