नई दिल्ली, 24 मार्च | सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ए को निरस्त कर दिया। न्यायलय ने इसे संविधान के अनुच्छेद 19 (1) ए के तहत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करार दिया। न्यायालय के इस फैसले के बाद फेसबुक, ट्विटर सहित सोशल मीडिया पर की जाने वाली किसी भी कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए पुलिस आरोपी को तुरंत गिरफ्तार नहीं कर पाएगी। यह भी पढ़ें–केंद्र, एस्सार को सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस

न्यायालय ने यह महत्वपूर्ण फैसला सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़े इस विवादास्पद कानून के दुरुपयोग की शिकायतों को लेकर इसके खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया। गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खां के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए एक छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया था। न्यायालय ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना के दिवंगत नेता बाला साहेब ठाकरे के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए दो छात्राओं को गिरफ्तार किया गया था। उस घटना के बाद ही न्यायालय में इस अधिनियम के खिलाफ याचिका दायर की गई थी।