नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवा बहाली के आदेश देने से फिलहाल इनकार कर दिया है. दरअसल, जम्मू कश्मीर में 4जी सेवा ना होने पर दायर याचिकाओं पर वकील हुफेजा अहमदी ने दलील दी थी कि, 2जी सेवाओं से बच्चों की पढ़ाई और कारोबार में दिक्कत आ रही है. जिसके चलते Jammu Kashmir में 4जी इंटरनेट की बहाली की मांग की गई थी.Also Read - Latest Weather Update: जम्मू-कश्मीर में बारिश-बर्फबारी एक साथ, कड़ाके की ठंड जारी

जम्मू-कश्मीर में 4जी सेवा चालू करने पर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला देते हुए सरकार ने इस मामले में एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं. जो अलग-अलग याचिकाकर्ताओं के उठाए विवादों पर विचार करेगी. सुप्रीम कोर्ट दिए आदेश के मुताबिक, इस समिति का नेतृत्व गृह मंत्रालय सचिव करेंगे. Also Read - 75 साल से आर्टिकल 370 के रहते जम्मू कश्मीर में शांति क्यों नहीं थी? : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पूछा

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न्यायमूर्ति एनवी रमण ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि हम समझते हैं कि केंद्र शासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर) संकट में है और देश भर में उत्पन्न हुई कोरोना महामारी और इसे उत्पन्न हुई कठिनाई से संबंधित चिंताओं पर भी कोर्ट संज्ञान ले रही है, लेकिन अदालत को यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवाधिकार में संतुलन बना रहे. ऐसा ना हो कि मानवाधिकार की वजह से राष्ट्र सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो.

न्यायालय ने फाउण्डेशन फॉर मीडिया प्रफेशनल्स , शोएब कुरैशी और जम्मू कश्मीर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की याचिकाओं पर यह फैसला सुनाया और साथ ही यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और मानव अधिकारों के बीच संतुलन सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

जम्मू-कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवा की बहाली पर दायर याचिकाओं पर और याचिकाकर्ताओं के विवाद पर अदालत ने कहा कि इन विवादों को देखने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी. जिसकी स्थापना तुरंत की जाएगी. कोर्ट ने कहा इस समिति का नेतृत्व गृह मंत्रालय सचिव द्वारा किया जाएगा. बता दें इससे पहले जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हलफनामा दायर की थी, जिसमें प्रशासन ने 4जी सेवाओं की बहाली का विरोध किया था.