नई दिल्ली: देश का नाम इंडिया (India) से भारत (Bharat) करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दखल देने से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंडिया का नाम पहले से ही भारत है. संविधान में इंडिया को पहले से ही भारत कहा गया है. प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से पूछा, आप यहां क्यों आए हैं? सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर विचार करने से मना करते हुए कहा कि याचिका को सरकार के लिए एक प्रतिवेदन के रूप में लिया सकता है. Also Read - तमिलनाडु सरकार ने कहा- मेडिकल, डेंटल सीटों पर अखिल भारतीय कोटा में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए उठा रहे हैं कदम

दिल्ली निवासी याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अश्विन वैश्य ने दलील दी कि याचिका में संविधान के अनुच्छेद-1 में संशोधन की मांग की गई है. इस पर प्रधान न्यायाधीश बोबड़े ने कहा, हम ऐसा नहीं कर सकते हैं. उन्होंने दोहराया कि इंडिया को पहले ही संविधान में भारत कहा गया है. वैश्य ने दलील दी कि अंग्रेजी नाम भारत देश की संस्कृति और परंपरा का प्रतिनिधित्व नहीं करता है. और इसके अलावा इसका मूल ग्रीक है और यह ‘इंडिका’ शब्द से लिया गया है. Also Read - भारत को मिला अमेरिका का समर्थन, माइक पॉम्पिओ बोले- चीन को भारत ने दिया सही जवाब

अश्विन वैश्य ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से ऐसे कई उदाहरण हैं, जहां ‘भारत माता की जय’ का इस्तेमाल किया गया है. उन्होंने शीर्ष अदालत से आग्रह किया कि उन्हें उपयुक्त मंत्रालयों के समक्ष एक प्रस्तुति देने की अनुमति दी जाए. शीर्ष अदालत ने कहा कि इस विशेष याचिका को केंद्र द्वारा एक रिप्रेजेंटेशन के तौर पर माना जाए. याचिका में दावा किया गया है कि इससे देश के नागरिक औपनिवेशिक अतीत से बाहर निकलेंगे और राष्ट्रीयता में गर्व का अनुभव करेंगे. याचिका में कहा गया कि प्रतीकात्मक प्रतीत होने वाले अंग्रेजी नाम को हटाने से हमारी राष्ट्रीयता में गर्व की भावना पैदा होगी, विशेष रूप से भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी यह गौरव का प्रतीक होगा. Also Read - पाकिस्तान ने कहा- कुलभूषण जाधव ने अपील दायर करने से मना किया, भारत ने दावे को बताया ‘स्वांग’