कलकत्ता| कोलकाता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायधीश सी एस कर्णन को कम से कम छह महीने जेल में रहकर काटना होगा. छह माह की सजा निलंबित करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट गए कर्णन की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशों की सात सदस्यीय पीठ पहले ही एक आदेश पारित कर चुकी है और अब केवल विशेष पीठ ही इसकी सुनाई कर सकती है. कोर्ट की दो जजों की बेंच ने कहा कि सात जजों की संविधान पीठ ने उन्हें छह महीने की सजा सुनवाई है.ऐसे में ये बेंच उस आदेश पर कोई सुनवाई नहीं कर सकती.Also Read - Pegasus controversy: सुप्रीम कोर्ट ने वकील की खिंचाई की, कहा- प्रधानमंत्री को नोटिस नहीं भेज सकते

कर्णन की ओर से पेश अधिवक्ता मैथ्यू जे नेदुम्पारा ने कहा कि अदालत के पास सभी अधिकार हैं और उसे तब तक के लिए कर्णन को अंतरिम जमानत देना चाहिए जब तक अदालत फिर से नहीं खुल जाती. इस पर पीठ ने कहा कि सात न्यायाधीशों की पीठ पहले ही आदेश पारित कर चुकी है और केवल विशेष पीठ ही अपील सुन सकती है. Also Read - पत्नी को टॉर्चर करता है पति, सुप्रीम कोर्ट ने 'हिंदी' में समझाया- सुधर जाओ, वरना...

अदालत की अवमानना के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा छह माह की सजा सुनाए जाने के बाद एक माह से भी अधिक समय तक गायब रहे कर्णन को कोलकाता पुलिस ने तमिलनाडु के कोयंबटूर से गिरफ्तार किया. अदालत की अवमानना के आरोप में उन्हें छह महीने की जेल की सजा सुनाई जा चुकी है. Also Read - पैरालंपियन निशानेबाज को टोक्यो पैरालंपिक्स के दल में तत्काल शामिल किया जाए: सुप्रीम कोर्ट

एक शीर्ष पुलिस अधिकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल पुलिस की टीम ने 20 जून को 62 वर्षीय कर्णन को मालुमीचमपट्टी के निजी रिसॉर्ट से गिरफ्तार किया. वह उच्च न्यायालय के पहले ऐसे सेवारत न्यायाधीश हैं जिन्हें उच्चतम न्यायालय ने कैद की सजा सुनाई है.

पिछले कुछ दिनों से यहां ठहरे कर्णन ने गिरफ्तारी का विरोध किया और पुलिस से कहासुनी की. आठ दिन पहले वह कानून के भगोड़े के रूप में सेवानिवृत्त हो गए और उन्हें कलकत्ता उच्च न्यायालय में मौजूद नहीं होने के कारण परम्परागत रूप से विदाई नहीं दी गई.

भारत के प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की सात सदस्यीय पीठ ने कर्णन को नौ मई को अदालत की अवमानना के आरोप में छह महीने जेल की सजा सुनाई थी जब वह कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे.