नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एडवोकेट प्रशांत भूषण को अवमानना के एक मामले में सजा सुनाए जाने के लिए सुनवाई के दौरान उनके वकील से कहा कि कोर्ट ने भूषण को दोषी ठहराया है. न्यायमूर्ति ने आगे कहा कि कोर्ट हमेशा उनके लिए निष्पक्ष रहा है, लेकिन क्या वह कोर्ट के प्रति निष्पक्ष हैं ये हम नहीं जानते. न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने भूषण का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ एडवोकेट दुष्यंत दवे से कहा, “हम आपके लिए हमेशा निष्पक्ष रहे हैं. हमें नहीं पता कि आप हमारे लिए निष्पक्ष हैं या नहीं.” Also Read - No Parking No Car: दिल्ली मे कार लेने से पहले दिखाने होंगे पार्किंग के सबूत वरना नई कार के लिए करना पड़ेगा 15 साल का इंतजार

पीठ ने दवे से कहा कि अगर भूषण को अवमानना का दोषी ठहराया गया है और सजा सुनाई जाती है, तो उन्हें तब तक सजा नहीं होगी, जब तक कि वह 14 अगस्त के फैसले के खिलाफ एक समीक्षा याचिका दायर नहीं करते हैं, और यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने इस 14 अगस्त को भूषण को दो ट्वीट के माध्यम से न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का दोषी ठहराया था, हालांकि बाद में ट्विटर ने उन्हें हटा दिया था. Also Read - प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए पर्याप्त नियमन मौजूद, डिजिटल मीडिया का नियमन पहले हो: केंद्र

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह आपराधिक अवमानना के लिए दोषी ठहराए जाने की सजा के खिलाफ उनकी समीक्षा याचिका पर फैसला सुनाने के लिए भूषण की याचिका का इंतजार करने को लेकर उत्सुक नहीं है. पीठ ने कहा कि सजा सुनाने के बाद ही फैसला पूरा होगा. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने टीवी शो पर लगाई फटकार, कहा- अन्य नागरिक के जैसा है पत्रकार, अमेरिका की तरह कोई अलग से स्वतंत्रता नहीं

सुनवाई के दौरान भूषण ने महात्मा गांधी की पंक्तियों का उदाहरण देते हुए कहा कि वह दो ट्वीट्स के लिए माफी नहीं मांगेंगे और उन्हें जो सजा दी जाएगी उसे खुशी से स्वीकार करेंगे. भूषण ने कहा “कोर्ट जिसे अपराध मान रहा है, मैं उसे अपना सच्चा कर्तव्य मानता हूं, उसके लिए किसी भी तरह का दंड देना चाहें, तो दे सकते हैं.” सजा पर सुनवाई जारी है.