नई दिल्ली। देश में एक बड़ी बहस छिड़ी हुई है कि क्या निजता का अधिकार नागरिकों का मौलिक अधिकार है या नहीं? इसी सवाल पर सुप्रीम कोर्ट में भी पिछले सात दिनों से बहस जारी है जो बुधवार को पूरी हो गई. सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच ने इस मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को स्पष्ट कर दिया था कि वह आधार खत्म नहीं करने जा रही है. सिर्फ नागरिकों की निजता पर संतुलन बनाने पर सुनवाई कर रही है. दरअसल, सुनवाई के दौरान केंद्र की तरफ से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने चिंता जताते हुए कहा था, ‘अगर प्राइवेसी को मौलिक अधिकार मान लिया तो आधार खत्म हो जाएगा. इससे गुड गवर्नेंस प्रभावित होगा.’

आधार को लेकर आम जनता की चिंता को कम करते हुए संगठन के एडिशनल सॉलिसिटर ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार चाहे भी तो नागरिकों की जासूसी में आधार का इस्तेमाल नहीं कर सकती है, क्योंकि ये तकनीकी रूप से मुमकिन ही नहीं है.

केंद्र सरकार ने कहा है कि डाटा प्रोटेक्शन पर कानून ड्राफ्ट करने के लिए एक्सपर्ट कमेटी का गठन कर दिया गया है. सरकार ने बताया कि डाटा प्रोटोक्शन पर विचार करने वाली 10 सदस्यीय कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज बीएन श्रीकृष्णा हैं.