Supreme Court Revised Sop On Bail Amount For Poor Undertrials Read Full Story Here
खुशखबरी! दिवाली पर SC ने कैदियों को दिया गिफ्ट, सरकार को जारी किया ये बड़ा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने गरीब कैदियों की जमानत राशि के भुगतान के लिए एसओपी में संशोधन किया है. आइए जानते हैं इस नई प्रक्रिया से कैदियों को क्या-क्या फायदा मिलेगा?
नए आदेश के अनुसार, जिलाधिकारी या उनके द्वारा नामित व्यक्ति, प्राधिकरण के सचिव, पुलिस अधीक्षक, जेल के अधीक्षक/उपाधीक्षक और संबंधित जेल के प्रभारी न्यायाधीश की एक अधिकार प्राप्त समिति गठित होगी. प्राधिकरण का सचिव इस समिति की बैठकों का संयोजक होगा और समिति हर महीने के पहले और तीसरे सोमवार को बैठक करेगी, अगर ये अवकाश पर हों तो अगले कार्यदिवस पर आयोजित होगी.
यहां समझें जमानत राशि भुगतान का प्रोसेस
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगर विचाराधीन कैदी को जमानत का आदेश मिलता है और सात दिनों के भीतर जेल से रिहाई नहीं होती, तो जेल अधिकारी प्राधिकरण के सचिव को सूचित करेंगे. प्राधिकरण सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि कैदी के बचत खाते में जमानत राशि मौजूद है या नहीं. अगर राशि नहीं है, तो पांच दिनों के भीतर प्राधिकरण को भुगतान के लिए अनुरोध भेजा जाएगा. इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) में एकीकरण लंबित रहने तक, अधिकार प्राप्त समिति प्राधिकरण की सिफारिश के आधार पर जमानत राशि जारी करेगी.
गरीब कैदियों को मिलती है वित्तीय सहायता
अगर समिति यह तय करती है कि विचाराधीन कैदी गरीब कैदियों को सहायता योजना के अंतर्गत पात्र है, तो उसे अधिकतम 50,000 रुपये तक की सहायता दी जा सकती है. यह राशि अदालत के पास सावधि जमा या अन्य निर्धारित माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यह प्रक्रिया समिति के निर्णय के पांच दिनों के भीतर पूरी होनी चाहिए. इसके अलावा, अगर जमानत राशि 50,000 रुपये से अधिक है, तो समिति अपने विवेक का प्रयोग करते हुए एक लाख रुपये तक भुगतान कर सकती है.
आगे की प्रक्रिया क्या है? यहां जानें
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ICJS में एकीकरण लंबित रहने तक इस आदेश की जानकारी ईमेल के माध्यम से प्राधिकरण और जेल अधिकारियों को दी जाएगी. अगर पांच दिनों में धनराशि जमा नहीं होती और कैदी को रिहा नहीं किया जाता, तो जेल अधिकारी छठे दिन प्राधिकरण को सूचित करेंगे. यदि कैदी को बरी या दोषी ठहराया जाता है, तो अधीनस्थ अदालत उचित आदेश के माध्यम से धनराशि सरकार के खाते में वापस कर सकती है. इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने गरीब कैदियों की जमानत राशि के भुगतान को तेज, पारदर्शी और सुनिश्चित बनाने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और समयसीमा तय की है.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.