नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के मामले में बड़ी टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रवासी मजदूरों से बस और ट्रेन का किराया नहीं वसूला जाए. इसके साथ ही बसों और ट्रेनों में यात्रा कर रहे मजदूरों को खाना और पानी भी मुहैया कराया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि जो मजदूर पैदल दिखें, स्थानीय प्रशासन उन्हें शेल्टर होम ले जाए और खाने-पीने का इंतज़ाम करे. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि सरकारों ने इंतज़ाम किए लेकिन इसमें कई जगहों पर चूक भी हुई है. कोशिशों का फायदा मजदूरों को नहीं मिलते दिखा. Also Read - कोविड-19 की दवा विकसित करने के लिए 'ड्रग डिस्कवरी हैकाथन' शुरू, देश में पहली बार हो रही ऐसी पहल

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को उस नोटिस के जवाब के लिए और वक़्त दिया है, जिसमें पूछा गया था कि प्रवासी मजदूरों के लिए क्या-क्या और किस तरह की कोशिशें की गईं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों की बदहाली के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया था. ये नोटिस मंगलवार को जारी किया गया था. इसमें सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि सरकारों ने मजदूरों के लिए क्या और किस तरह के इंतज़ाम किये हैं. Also Read - तमिलनाडु सरकार मेडिकल प्रवेश में ओबीसी आरक्षण पर जल्द फैसले को लेकर पहुंची सुप्रीम कोर्ट  

प्रवासी मजदूरों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों ने नोटिस का जवाब भी दिया है. इसे लेकर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि सरकारें नोटिस का जवाब नहीं दे पाई हैं. उन्हें जवाब के लिए कुछ और वक़्त दिया जाता है. Also Read - ICAI CA Exam: आईसीएआई ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- सीए परीक्षा के आयोजन की व्यवहार्यता पर करेंगे विचार, जानें कब से होगा एग्जाम