नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहराने से मना कर दिया, जिनके खिलाफ आरोप-पत्रों पर अदालतों ने संज्ञान लिया है. लेकिन न्यायालय ने इस समस्या से निपटने के लिए संसद से कानून बनाने का आग्रह किया, ताकि आपराधिक छवि वाले नेता विधायिका में प्रवेश नहीं कर सकें. Also Read - सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई रिपोर्ट, देश में 4442 नेता हैं अपराधी, नंबर वन यूपी, दूसरे नंबर पर बिहार

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शीर्ष अदालत ने कहा कि यह कानून में कोई और अपात्रता नहीं जोड़ सकती. साथ ही इसने राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ रहे उनके जिन उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उनकी जानकारी अपनी वेबसाइटों और मीडिया में सार्वजनिक करने के निर्देश दिए. Also Read - Sushant Case: CBI जांच की मंजूरी पर सुशांत के भाई का बयान, बोले- अब उम्मीद है इंसाफ मिलेगा 

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई में पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि यह कानून ऐसा होना चाहिए, जो राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को फंसाने के लिए बनाए जाने वाले फर्जी मामलों से भी निपटने में सक्षम हो.

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सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश दिए :

– हर उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करते समय पर्चे में अपने लंबित आपराधिक मामलों के बारे में ‘बोल्ड’ में जानकारी देनी होगी.

– चुनाव में खड़े होने के इच्छुक दावेदारों को अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी संबद्ध राजनीतिक पार्टी को देनी होगी.

– राजनीतिक पार्टियों को अपने उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड वेबसाइट पर सार्वजनिक करने होंगे.

– नामांकन दाखिल करने के बाद राजनीतिक दल और उम्मीदवार को लंबित आपराधिक मामलों की जानकारी विस्तार से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों में देनी होगी.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्ति के विधायिका में प्रवेश को रोकने के लिए कानून बनाने की जिम्मेदारी अब संसद के ऊपर है.