नई दिल्ली. साल 2009 में मायावती के कार्यकाल के दौरान बनाई गई मूर्तियों को लेकर उन्हें शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने मायावती को मूर्तियों और स्मारकों का पैसा लौटाने को कहा है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने ये फैसला साल 2009 में डाली गई एक जनहित याचिका पर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, प्रथम दृष्टया केस को देखते हुए कहा जा सकता है कि मायावती को मूर्तियों पर खर्च किए गए पैसे को लौटाना होगा, क्योंकि ये जनता के हैं. उन्होंने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 2 अप्रैल बताई गई है.

बसपा सुप्रीमो मायावती साल 2007 से 2012 तक यूपी की सीएम थीं. इस दौरान उन्होंने प्रदेश के कई शहरों में हाथी और अपनी मूर्तियां लगवाई थीं. इतना ही नहीं उन्होंने जो पार्क और स्मारक बनवाए थे, उसमें भी उनकी और हाथी की कई-कई मूर्तियां थीं. वहां उन्होंने आंबेडकर और कांशीराम की भी मूर्तियां लगवाईं. इसकी काफी आलोचना हुई थी. लोगों का कहना था कि मायावती जनता के पैसे को पत्थरों पर खर्च कर रही हैं.

साल 2009 में डाली गई थी याचिका
इसी दौरान साल 2009 में इन मूर्तियों को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी. उस समय सपा ने भी मायावती के इस रुख का काफी विरोध किया था. उसी मामले में तकरीबन 10 साल बाट चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसला सुनाया है. मायावती के खिलाफ ये फैसला साल 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर भी असर डाल सकते हैं.