Supreme Court: अक्सर आपने सुना होगा जब कोर्ट में जज को माई लार्ड, और योर ऑनर कहा जाता है. सुप्रीम कोर्ट में एक कानून के छात्र में भी जजों को यही कहकर संबोधित किया, लेकिन जजों ने इस पर आपत्ति जता दी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक कानून के छात्र द्वारा न्यायाधीशों को ‘योर ऑनर’ संबोधित करने पर आपत्ति जताई. प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और वी. रामसुब्रमण्यम की पीठ ने कानून के छात्र से कहा, “जब आप हमें योर ऑनर कहते हैं, तो आपके दिमाग में या तो यूनाइटेड स्टेट्स का सुप्रीम कोर्ट है या मजिस्ट्रेट है.Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने EC और केंद्र को जारी किया नोटिस, कहा- सार्वजनिक पैसों से मुफ्त की चीजें बांटने वालों का पंजीकरण हो रद्द

याचिकाकर्ता ने तुरंत माफी मांगी और कहा कि उनका न्यायाधीशों को अपसेट करने का कोई इरादा नहीं था. याचिकाकर्ता ने कहा कि वह अपने मामले पर बहस करते हुए ‘माई लॉर्डस’ का इस्तेमाल करेगा. मुख्य न्यायाधीश ने जवाब दिया, “जो भी हो. हम विशेष नहीं हैं कि आप हमें क्या कहते हैं, लेकिन गलत शब्दों का उपयोग न करें.” Also Read - Reliance Vs DMRC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, समझौते के लिए बातचीत का सवाल ही नहीं

कानून के छात्र ने अधीनस्थ न्यायपालिका में रिक्तियों को दाखिल करने के संबंध में शीर्ष अदालत में याचिका दायर की थी. न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम ने कानून के छात्र को समझाते हुए कहा कि उनके तर्क में कुछ महत्वपूर्ण गायब है और वह इस मामले में अपना होमवर्क किए बिना अदालत में आए हैं. उन्होंने पाया कि कानून के छात्र मलिक मजहर सुल्तान मामले में निर्देशों को भूल गए हैं और अधीनस्थ न्यायपालिका में नियुक्तियां इस मामले में निर्धारित समय-सीमा के अनुसार की जाती हैं. Also Read - Supreme Court का आदेश- ट्विन-टावर में घर खरीदारों को ब्याज सहित रकम वापस करे सुपरटेक, समय सीमा 28 फरवरी तक

मामले को स्थगित करते हुए, पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस मामले का अध्ययन करे और बाद में वापस आ जाए. अदालत ने साथ ही याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने और बहस करने की अनुमति दे दी. सुप्रीर्म कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “याचिकाकर्ता के अनुरोध पर, चार सप्ताह के बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाए.”