गुजरात के अमरेली में स्थित गिर के जंगल में पिछले 18 दिनों में 21 शेरों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है. कोर्ट ने केंद्र और गुजरात सरकार से कहा है कि शेरों की मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए. कोर्ट ने कहा है कि यह एक गंभीर मुद्दा है और सरकारों को उन्हें बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए.

बता दें कि रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 18 दिनों में वहां 21 शेरों की मौत हो चुकी है. वन विभाग का कहना है कि शेरों की मौत का कारण आपसी संघर्ष और अज्ञात बीमारी है. दूसरी तरफ जूनागढ़ के चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (वाइल्डलाइफ) का कहना है कि दलखनिया रेंज में 21 शेरों की मौत हो चुकी है. दूसरी जगह पर शेर के मौत का मामला सामने नहीं आया है. समरदी क्षेत्र से 31 शेरों को बचाया गया है और उनका चेकअप किया जा रहा है. उन्हें सुरक्षित रखने के सभी उपाय किए जा रहे हैं.

दूसरी तरफ ये कहा जा रहा है कि खतरनाक कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) और प्रोटोजोवा संक्रमण की वजह से शेरों की मौत हो रही है. कहा जा रहा है कि पहले इस अभ्यारण्य में 26 शेर रहते थे. लेकिन अचानक से इनकी संख्या तीन पर आ गई है.

460 शेरों की हुई स्कैनिंग
गिर में शेरों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है जिसे लेकर वन विभाग में खासी अफरा तफरी मची हुई है. शेरों की मॉनिटरिंग और स्कैनिंग के लिए गिर के जंगल में 140 टीम बनाई गई हैं जिसके 585 कर्मचारियों के जरिए रेंज के शेरों पर नजर रखी जा रही है. वन विभाग के एक अधिकारी ने रविवार को मीडिया को यह जानकारी देते हुए बताया कि 14 शेरों की मौत के बाद यह अभियान को और तेज कर दिया गया है.

कड़ी निगरानी कर रहा विभाग
गिर-पूर्वी संभाग में डलखानिया रेंज और इसके आसपास 11 शेरों की मौत के बाद 24 सितंबर को वन विभाग ने गिर वन में शेरों की पहचान और बचाव के लिए एक अभियान चलाया था. लेकिन पिछले सप्ताह अभियान के दौरान तीन और शेर मारे गए जिससे मृत शेरों की संख्या 14 हो गई. वन विभाग का दावा है कि जब शेरों को भर्ती कराया गया था तो वे पहले से ही गंभीर रूप से बीमार थे और काफी प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया न जा सका हालांकि भर्ती कराए गए अन्य शेरों के स्वास्थ्य की कड़ी निगरानी की जा रही है.